अक्षय तृतीया पर छह योगों का संयोग, इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा के साथ जरूर करें ये उपाय

हिंदू पंचांग के अनुसार तीन ऐसे मुहुर्त हैं, जिनमें बिना पंचाग देखे कोई भी शुभ कार्य संपन्न किया जा सकता है। पहला वसंत पंचमी, दूसरा देवउठनी एकादशी और तीसरा महामुहूर्त अक्षय तृतीया को माना जाता है। इस साल 22 अप्रैल को महामुहूर्त माने जाने वाले अक्षय तृतीया पर छह योगों का संयोग बन रहा है। इनमें आयुष्मान योग, सौभाग्य योग, त्रिपुष्कर योग, रवि योग, अमृत सिद्धि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग है। तृतीया से लेकर अगले दिन तक सुबह तक श्रेष्ठ मुहूर्त में विवाह के फेरे लिए जा सकेंगे। अक्षय तृतीया को गांव-गांव में अक्ती के नाम से जाना जाता है। इस दिन हजारों युवा ब्याह रचाएंगे।
अक्षय तृतीया के दिन करें मां लक्ष्मी की पूजा
ज्योतिषाचार्य डा.दत्तात्रेय होस्केरे के अनुसार हिंदू संवत्सर के वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया कहते हैं। इस दिन सूर्य मेष राशि में और चंद्रमा वृषभ राशि में होता है। इस स्थिति को मांगलिक कार्यों के लिए शुभ माना जाता है। अक्षय तृतीया समृद्धि का सूचक है। इस दिन मां लक्ष्मी की भी पूजा करनी चाहिए। सोना, चांदी खरीदना शुभ माना जाता है। तृतीया तिथि 22 अप्रैल को सुबह 7.49 बजे से प्रारंभ होकर 23 अप्रैल को सुबह 7.47 बजे तक रहेगी।
बच्चे रचाएंगे गुड्डा-गुड़िया का ब्याह
महामाया मंदिर के पुजारी पं. मनोज शुक्ला के अनुसार अक्ती यानी अक्षय तृतीया को विवाह के लिए श्रेष्ठ मुहूर्त माना जाता है। ग्रामीण इलाकों में बच्चों को अपनी संस्कृति से जोड़े रखने और धार्मिक रीतिरिवाजों की सीख देने के लिए गुड्डा-गुड़िया का ब्याह रचाने की परंपरा निभाई जाती है। ब्याह में निभाई जाने वाली रस्मों की जानकारी बुजुर्ग अपने परिवार के बच्चों को देते हैं।
अक्ती का बाजार सजने लगा
अक्ती पर गांव-गांव में ढेरों शादियां होंगी। विवाह में उपयोग में लाई जाने वाली सामग्री की बिक्री होने लगी है। साफा, पगड़ी, मौर-मुकुट, बांस का पर्रा, सूपा, टोकरी, मटके, तोरण का बाजार सजने लगा है।
यह कार्य करें
– पवित्र नदियों में स्नान करें
मटका, अनाज, वस्त्र, फल का दान करें
– नए व्यापार का प्रारंभ करें
इसलिए है अक्षय तृतीया का महत्व
– सतयुग और त्रेतायुग का आरंभ काल
– खुलते हैं बद्रीनाथ धाम के पट
– नरनारायण का अवतरण
– परशुराम का अवतरण
– मां गंगा और मां अन्नापूर्णा का अवतरण
– श्रीकृष्ण ने द्रोपदी को चीरहरण से बचाया
– कुबेर को मिला खजाना
– श्रीकृष्ण-सुदामा का मिलन
– ब्रह्मा पुत्र अक्षय कुमार का अवतरण
– वृंदावन में बांकेबिहारी मंदिर में चरण दर्शन
योग – समय
आयुष्मान योग – सूर्योदय से सुबह 9.26 बजे तक
सौभाग्य योग – सुबह 9.25 से अगले दिन सुबह 8.21 बजे तक
त्रिपुष्कर योग – सुबह 5.49 से 7.49 बजे तक
रवि योग- रात्रि 11.24 से 23 अप्रैल को 5.48 बजे तक
सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग- रात्रि 11. 24 से 23 अप्रैल सुबह 5.48 बजे तक
सोना खरीदी का मुहूर्त
22 अप्रैल को सुबह 7.49 से 23 अप्रैल को सुबह 7.47 बजे तक