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साल में सिर्फ 5 घंटे खुलता है निराई माता का ये रहस्यमयी मंदिर, महिलाओं की नो एंट्री, बिना तेल के जलती ज्योति

Chhattisgarh March 20, 2026 रिपोर्टर: shailesh
साल में सिर्फ 5 घंटे खुलता है निराई माता का ये रहस्यमयी मंदिर, महिलाओं की नो एंट्री, बिना तेल के जलती ज्योति

साल में सिर्फ 5 घंटे खुलता है निराई माता का ये रहस्यमयी मंदिर, महिलाओं की नो एंट्री, बिना तेल के जलती ज्योति

गरियाबंद/धमतरी : छत्तीसगढ़ की आस्था और रहस्यों से भरी धरती पर स्थित निरई माता मंदिर एक ऐसा अलौकिक धाम है, जहां परंपराएं और मान्यताएं आज भी लोगों को हैरान कर देती हैं। पहाड़ियों के बीच बसा यह मंदिर अपने अनोखे नियमों और चमत्कारों के कारण पूरे प्रदेश ही नहीं, बल्कि देशभर में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

यह मंदिर गरियाबंद जिला मुख्यालय से करीब 12 किलोमीटर दूर निरई पहाड़ी पर स्थित है। खास बात यह है कि माता का यह दरबार साल में सिर्फ चैत्र नवरात्रि के प्रथम रविवार को ही खुलता है, जानकारी के मुताबिक वो भी मात्र सुबह 4 बजे से 9 बजे तक यानी सिर्फ 5 घंटे के लिए। इस दौरान हजारों श्रद्धालु कठिन रास्तों को पार कर माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

बिना तेल के जलती है दिव्य ज्योति

निरई माता मंदिर का सबसे बड़ा रहस्य यहां जलने वाली ज्योति है। मान्यता है कि चैत्र नवरात्रि के दौरान यहां स्वतः ज्योति प्रज्ज्वलित होती है, जो बिना तेल के लगातार 9 दिनों तक जलती रहती है। यह चमत्कार आज तक विज्ञान और लोगों के लिए एक अनसुलझी पहेली बना हुआ है, जिसे श्रद्धालु माता की दिव्य शक्ति मानते हैं।

महिलाओं के प्रवेश पर सख्त प्रतिबंध

इस मंदिर की सबसे अनोखी परंपरा यह है कि यहां महिलाओं का प्रवेश पूरी तरह वर्जित है। सिर्फ पुरुष ही मंदिर में प्रवेश कर पूजा-अर्चना कर सकते हैं। इतना ही नहीं, महिलाओं के लिए यहां का प्रसाद ग्रहण करना भी मना है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, नियमों का उल्लंघन करने पर अनहोनी की आशंका रहती है।

अलग है पूजा की परंपरा

जहां अन्य देवी मंदिरों में सिंदूर, कुमकुम और श्रृंगार चढ़ाया जाता है, वहीं निरई माता के दरबार में ये सब नहीं चढ़ाया जाता। यहां माता को केवल नारियल और अगरबत्ती अर्पित कर पूजा की जाती है, जो इस मंदिर को और भी विशिष्ट बनाता है।

मनोकामना पूरी होने पर दी जाती है बलि

लोक मान्यता के अनुसार, यहां बकरों की बलि देने की परंपरा भी सदियों से चली आ रही है। श्रद्धालु मानते हैं कि माता के दरबार में सच्चे मन से प्रार्थना करने और मनोकामना पूरी होने पर बलि अर्पित करने से उनकी इच्छाएं पूर्ण होती हैं।

नियम तोड़ने पर मिलता है दंड

ग्रामीणों का कहना है कि माता के दरबार में पवित्रता का विशेष ध्यान रखा जाता है। अगर कोई व्यक्ति शराब सेवन या गलत आचरण के साथ मंदिर में प्रवेश करता है, तो उसे माता के क्रोध का सामना करना पड़ता है।

आस्था और रहस्य का अद्भुत संगम

निरई माता मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, रहस्य और परंपराओं का अद्भुत संगम है। यहां की हर मान्यता, हर चमत्कार भक्तों के विश्वास को और मजबूत करता है। सच कहा जाए तो यह दरबार सिर्फ पूजा का स्थान नहीं, बल्कि वह शक्ति है जो भक्तों के लिए असंभव को संभव बना देती है।

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