भारतमाला परियोजना में भ्रष्टाचार की जांच की मांग, चरणदास महंत ने CBI जांच के लिए नितिन गडकरी को लिखा पत्र

रायपुर। छत्तीसगढ़ में भारतमाला परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण और मुआवजा वितरण में भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखा है। उन्होंने इस पूरे मामले की CBI से जांच कराने की मांग की है।
डॉ. महंत ने पत्र में लिखा कि रायपुर से विशाखापट्टनम तक प्रस्तावित इकोनॉमिक कॉरिडोर के अंतर्गत रायपुर जिले के अभनपुर अनुविभाग में निजी भूमि के अधिग्रहण से लेकर मुआवजा निर्धारण तक में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। उनका आरोप है कि आपराधिक षड्यंत्र के तहत लोक सेवकों और भूमि स्वामियों ने नियमों को ताक पर रखते हुए ₹43.18 करोड़ की आर्थिक क्षति भारत सरकार को पहुंचाई है।
मुआवजे में भारी अंतर
जांच प्रतिवेदन के अनुसार जहां वास्तविक मुआवजा राशि ₹7.65 करोड़ होनी चाहिए थी, वहां ₹49.39 करोड़ का भुगतान किया गया। यानी ₹43.18 करोड़ का अतिरिक्त भुगतान कर दिया गया। उन्होंने बताया कि भूमि अधिसूचना के बाद भी पुराने दिनांक में रजिस्ट्री, बटवारा, नामांतरण जैसी गतिविधियां कराई गईं, जिससे मुआवजे की दरें बढ़ गईं।
ईओडब्ल्यू जांच को बताया अवैध
चरणदास महंत ने कहा कि विधानसभा में 12 मार्च को उन्होंने मांग की थी कि चूंकि यह मामला भारत सरकार की परियोजना से जुड़ा है और इसमें वरिष्ठ अधिकारियों की भी संलिप्तता हो सकती है, इसलिए इसकी जांच या तो CBI से कराई जाए या फिर विधायकों की समिति बनाई जाए। लेकिन राज्य सरकार ने इस मांग को ठुकराकर ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो) से जांच कराने का निर्णय लिया, जो कि राज्य की एजेंसी है।
उन्होंने कहा कि चूंकि यह केंद्र की परियोजना है, इसलिए राज्य की कोई भी एजेंसी इसकी जांच के लिए सक्षम नहीं है, और अगर जांच हुई भी तो उसे अदालत में चुनौती दी जा सकती है जिससे भ्रष्टाचार के आरोपी बच निकलेंगे।
सरकार पर गंभीर आरोप
महंत ने आरोप लगाया कि जांच प्रतिवेदन राज्य सरकार को 11 सितंबर 2023 को मिल चुका था, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई तब तक नहीं हुई जब तक उन्होंने विधानसभा में प्रश्न नहीं उठाया। उन्होंने यह भी कहा कि अभी तक न तो ₹43.18 करोड़ की वसूली की गई और न ही किसी आरोपी के खिलाफ ठोस कानूनी कदम उठाए गए।
पूरे राज्य में जांच की मांग
उन्होंने कहा कि यह भ्रष्टाचार केवल अभनपुर क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतमाला परियोजना के तहत अधिग्रहित सभी जमीनों में इसी तरह की गड़बड़ियां की गई हैं। इसलिए पूरे प्रकरण की जांच CBI जैसी केंद्रीय एजेंसी से कराना जरूरी है, ताकि दोषियों को सज़ा मिल सके और जनता का विश्वास बहाल हो।