’72 हूरें’ : सेंसर बोर्ड पर जमकर बरसे अशोक पंडित, निर्माता ने कहा “पैसे कमाने के लिए नहीं बनाई फिल्म”

मुंबई : ‘लाहौर’ जैसी अवॉर्ड विनिंग फिल्म का निर्देशन कर चुके निर्देशक संजय पूरन सिंह चौहान की फिल्म ’72 हूरें’ इन दिनों ट्रेलर को सेंसर सर्टिफिकेट न मिलने की वजह से विवादों में है। फिल्म के मेकर्स कहना है कि फिल्म को जब पहले ही सेंसर सर्टिफिकेट फिल्म चुका है तो ट्रेलर को सेंसर सर्टिफिकेट देने में केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड को क्यों आपत्ति है, जब कि फिल्म का ट्रेलर फिल्म के सीन से निकालकर बनाया गया है। आज मुंबई में इस फिल्म के ट्रेलर लांच के दौरान फिल्म के सह- निर्माता अशोक पंडित ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड की कार्यप्रणाली के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

फिल्म ’72 हूरें’ के ट्रेलर लांच पर अशोक पंडित ने बताया, ‘इस फिल्म का ट्रेलर पहले हम लोग थियेटर में रिलीज करना चाह रहे थे। इसके लिए हमने थियेटर भी बुक कर लिए थे, लेकिन जब ट्रेलर को सेंसर सर्टिफिकेट मिला तो ट्रेलर को थियेटर में नहीं लांच कर सके। क्योंकि ट्रेलर को सेंसर सर्टिफिकेट न मिलने की वजह से थियेटर में ट्रेलर नहीं दिखा सकते थे,इसलिए ट्रेलर को आज ‘द क्लब’ में करना पड़ा। मैं इसको लेकर सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष प्रसून जोशी से बात करूंगा कि जब फिल्म को सेंसर सर्टिफिकेट मिल सकता है तो ट्रेलर को सेंसर सर्टिफिकेट देने में क्या आपत्ति थी।’

अशोक पंडित ने आगे बताया, ’72 हूरें को नेशनल अवार्ड मिल चुका है और वहां इस फिल्म को काफी सराहा गया। सरकार के ही तरफ से केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड का संचालन होता है। एक तरह सरकार के लोग फिल्म की सराहना करते है और दूसरी तरफ उनके ही नुमाइंदे फिल्म के ट्रेलर के कुछ दृश्य  को लेकर आपत्ति जता रहे हैं। जबकि फिल्म को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड की तरफ से पहले सेंसर सर्टिफिकेट मिल चुका है।’

केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के सदस्यों ने ट्रेलर में कुरान शब्द और कटे हुए पैर पर आपत्ति जताई है। अशोक पंडित ने कहा, ‘फिल्म में भी यह सीन है। जब पूरी फिल्म को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड बिना किसी कट के पास कर सकती है, तो ट्रेलर को सेंसर सर्टिफिकेट देने में भला क्या आपत्ति हो सकती है। इस फिल्म में ट्रेलर में वही दिखाया गया है जो फिल्म में है।

फिल्म के निर्देशक संजय पूरन सिंह चौहान ने कहा, ‘हमारी यह फिल्म किसी धर्म जाति और इंसानियत के खिलाफ नहीं है। यह फिल्म आतंकवाद के खिलाफ है।  जिस तरह से युवाओं को धर्म के नाम पर बरगलाया जाता है, वह गलत है।’  फिल्म के निर्माता गुलाब सिंह तंवर ने बताया, ‘जब हमने फिल्म की तैयारी शुरू की तो लोग कहते थे कि आप पैसा आग में डाल रहे हो। पानी में तो पैसा डालना समझ में आता है, उसने से पैसे निकल किसी तरह से तो निकल आते हैं, लेकिन आग  में तो पूरे पैसे जल जाएंगे। मेरा फिल्म बनाने का मकसद पैसा कमाना नहीं, बल्कि फिल्म के जरिए समाज को एक संदेश देना है और अगर इसके लिए पैसे जल भी जाए तो कोई परवाह नहीं है।’

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