250 साल की सजा : 4 हजार करोड़ के चिटफंड घोटाले में साई प्रसाद समूह के अध्यक्ष को कोर्ट ने सुनाया फैसला

सीहोर। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले की एक अदालत ने एक चिटफंड कंपनी के निदेशक को 20 राज्यों के 35 लाख से अधिक निवेशकों से 4,000 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी करने के आरोप में 250 साल कैद की सजा सुनाई है. यह शायद चिटफंड के मामले में अभी तक की सबसे लंबी जेल की सजा है. दोषी बालासाहेब भापकर साई प्रसाद समूह की कंपनियों के अध्यक्ष हैं. यह चिटफंड की कंपनी है. इसके साथ ही कोर्ट ने पिता और पुत्र सहित पांच अन्य को पांच-पांच साल कैद की सजा सुनाई है.

प्राप्त जानकारी के अनुसार आरोप है कि फर्म ने 17 नवंबर, 2009 और 13 मार्च, 2016 के बीच गांवों में लाखों लोगों रुपए जमा लिए थे. कंपनी ने दावा किया था कि 5 साल में पैसे को दोगुना कर देंगे.

भापकर साई प्रसाद समूह ने दूध विक्रेता के रूप में शुरुआत की थी और बाद में अचार, पापड़ और कृषि उत्पादों के निर्माण के लिए ग्रामीण महाराष्ट्र में सैकड़ों महिलाओं को रोजगार दिया था. उस दौरान उसने ने 18% वार्षिक रिटर्न का वादा करते हुए रियल एस्टेट परियोजनाओं के लिए निवेश आमंत्रित किया था, लेकिन बाद में कोई निर्माण परियोजना शुरू नहीं हुई, लेकिन यह चिटफंड कंपनी ने 20 राज्यों में अपना कारोबार फैलाने में सफलता हासिल की थी. सेबी ने भापकर साई प्रसाद समूह की कंपनियों की चार फर्मों के निदेशक साई प्रसाद को परिचालन बंद करने का आदेश दिया.

कोर्ट में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कहा कि अन्य कंपनियों और इन में पैसा लगाया था. इस योजना में पेट्रोलियम और निर्माण से लेकर ऊर्जा तक के क्षेत्रों में 23 सहायक कंपनियां शामिल थीं. कंपनी की ओर से आम लोगों से पैसे उगाहे गये, लेकिन कंपनी ने मैच्योरिटी रिटर्न नहीं दिया. इसे लेकर उस समय इलाके में काफी हंगामा मचा था. प्रत्येक दिन लोग कंपनी में शिकायत लेकर पहंचते थे, लेकिन कंपनी ने पैसा वापस नहीं किया. उसके बाद ठगे गए 300 निवेशकों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. मुंबई की ईओडब्ल्यू ने 2020 में साई प्रसाद समूह की चार कंपनियों के निदेशक को गिरफ्तार किया. भापकर और अन्य आरोपियों के खिलाफ जमाकर्ताओं के हितों के संरक्षण अधिनियम और आईपीसी की धारा 420, 409 और 120 बी के तहत आरोप पत्र दायर किया गया था और कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई थी. उसी मामले में कोर्ट ने फैसला सुनाया है.

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