कोल माइंस के लिए नहीं देंगे जमीन… एसईसीएल के खिलाफ ग्रामीणों ने खोला मोर्चा, कलेक्ट्रेट का किया घेराव

सरगुजा : सरगुजा क्षेत्र के अमेरा कोल माइंस के एक्सटेंशन का ग्रामीणों ने विरोध करना शुरू कर दिया है. गांव वालों का कहना है कि हम खदान के एक्सटेंशन के लिए अपनी जमीन नहीं देंगे, चाहे सरकार इसके लिए हमें कितना भी मुआवजा क्यों न दे. गांव वालों का कहना है कि सरकार हमें मुआवजा के रूप में रुपए देगी लेकिन रुपए कुछ दिन में खत्म हो जाएंगे, जबकि जमीन हमारे पास रहेगा तो हमारी आने वाली पीढ़ी खेती किसानी कर जीविकोपार्जन कर पाएगी.

एसईसीएल के खिलाफ गांव वालों ने खोला मोर्चा

सरगुजा जिले के लखनपुर क्षेत्र में स्थित है एसईसीएल का अमरा कोल माइंस और अब मेरा कोल माइंस में कोयला खत्म होने के कागज पर पहुंच गया है, ऐसे में एसईसीएल के द्वारा माइंस के आसपास के गांव की खेती की जमीन का अधिग्रहण कर खदान का विस्तार किया जा रहा है लेकिन ग्रामीण खदान एक्सटेंशन का विरोध करने के लिए अंबिकापुर पहुंचे, जहां उन्होंने कलेक्टर से मुलाकात की और कहा कि हमारे गांव में खदान का विस्तार होने से रोके और अगर खदान का विस्तार नहीं रुकता है तो वह उग्र प्रदर्शन करेंगे, आंदोलन करेंगे और किसी भी हालत में खदान नहीं खुलने देंगे.

ग्रामीण बोले- कोल माइंस के नहीं देंगे जमीन

दो दिन पहले गांव वालों ने एसईसीएल के कर्मचारियो को गांव से खदेड दिया था और इस दौरान एसईसीएल का डिप्टी मैनेजर घायल हो गया था. एसईसीएल प्रबंधन ने ग्रामीणों के खिलाफ थाने में रिपोर्ट दर्ज कराया है ऐसे में एसईसीएल और ग्रामीणों के बीच तनाव की स्थिति बनती जा रही है तो दूसरे तरफ गांव के लोग लगातार जमीन नहीं देने की बात कर रहें हैं.

कलेक्टर दफ्तर पहुंची 80 साल की विराजो नामक बुजुर्ग महिला ने हाथ जोड़कर कहा ‘हम अपनी धरती मां को नहीं देंगे जमीन चली जाएगी तो खेती कहां करेंगे मेरे नाती पोते कहां खेती करेंगे’ अमर सिंह नाम के व्यक्ति का कहना है कि सरकार मुआवजा एक बार देती है और कुछ साल बाद पूरा पैसा खत्म हो जाता है लेकिन जमीन तो हमारे पास है. और हम पीढ़ी दर पीढ़ी इस जमीन पर खेती कर रहे हैं, हमारी कई पीढ़ियां यहाँ खेती कर जीविकोपार्जन किये है. दो फसली खेती हम करते हैं, सिंचाई की व्यवस्था है, हम अपनी जमीन नहीं देंगे.

ग्रामीणों के साथ नहीं होने देंगे अन्याय – कलेक्टर

दूसरी तरफ माइनिंग कंपनी के द्वारा ग्रामीणों को भरोसा दिया जा रहा है कि उन्हें नौकरी के साथ मुआवजा भी मिलेगा, लेकिन ग्रामीणों का पुराना अनुभव ठीक नहीं है उनका कहना है कि जब उनके पड़ोसी गांव में माइंस खुल तब गांव के डेवलपमेंट की बात कही गई थी लेकिन इसके बाद भी उनके गांव में मूलभूत सुविधा अब तक विकसित नहीं हो सका है और उनकी जमीन चली गई तो कई लोग अभी भी नौकरी के लिए चक्कर लगा रहे हैं यही वजह है कि गांव वाले कॉल कंपनी पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं तो दूसरी तरफ सरगुजा कलेक्टर विलास भोसकर का कहना है कि एसईसीएल और गांव वालों की बात सुनी जा रहीं है. गांव वालों के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा.

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