विष्णुदेव साय : सरपंच से छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री तक, सादगी, संगठन में स्वीकार्यता और शांत राजनीतिक शैली उन्हें देती है अलग पहचान

रायपुर : छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 21 फरवरी 2026 को अपना 62वां जन्मदिन मना रहे हैं. साल 1964 में एक साधारण किसान परिवार में जन्मे साय ने गांव की राजनीति से सफर शुरू किया और लंबे संगठनात्मक अनुभव के बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री पद तक पहुंचे. उनकी सादगी, संगठन में स्वीकार्यता और शांत राजनीतिक शैली उन्हें अलग पहचान देती है.

विष्णु देव साय: राजनीतिक सफर एक नजर में

1990-998: अविभाजित मध्य प्रदेश विधानसभा के सदस्य (दो कार्यकाल)

1999: 13वीं लोकसभा के लिए निर्वाचित

1999-2000: सदन की अनुपस्थिति समिति तथा खाद्य, नागरिक आपूर्ति और सार्वजनिक वितरण समिति के सदस्य

2000-2004: कृषि मंत्रालय की परामर्श समिति के सदस्य

2004: 14वीं लोकसभा के लिए पुनः निर्वाचित (दूसरा कार्यकाल), सूचना प्रौद्योगिकी समिति के सदस्य

5 अगस्त 2007: जल संसाधन समिति के सदस्य

2009: 15वीं लोकसभा के लिए पुनः निर्वाचित (तीसरा कार्यकाल)

31 अगस्त 2009: वाणिज्य समिति के सदस्य

2014: 16वीं लोकसभा के लिए पुनः निर्वाचित (चौथा कार्यकाल)

नवंबर 2014: खान और इस्पात मंत्रालय में केंद्रीय राज्य मंत्री

5 जुलाई 2016: केंद्रीय राज्य मंत्री, इस्पात मंत्रालय

3 दिसंबर 2023: छत्तीसगढ़ विधानसभा के सदस्य निर्वाचित

10 दिसंबर 2023: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री पद की शपथ

जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि

विष्णुदेव साय का जन्म 21 फरवरी 1964 को छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के फरसाबहार विकासखंड के ग्राम बगिया में किसान पिता राम प्रसाद साय और माता जसमनी देवी साय के घर हुआ. उनकी शादी 27 मई 1991 को कौशल्या देवी साय से हुई. उनके एक पुत्र और दो पुत्रियां हैं. साय ने जशपुर जिले के कुनकुरी से हायर सेकेंडरी तक शिक्षा प्राप्त की.

पंचायत से विधानसभा तक का सफर

साल 1989 में अविभाजित मध्यप्रदेश की बगिया ग्राम पंचायत में पंच के रूप में उन्होंने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की. वर्ष 1990 में वे ग्राम पंचायत बगिया के निर्विरोध सरपंच चुने गए. इसी वर्ष वे तपकरा विधानसभा सीट से भाजपा विधायक निर्वाचित हुए. 1990 से 1998 तक वे अविभाजित मध्यप्रदेश की तपकरा सीट से दो बार विधायक रहे और क्षेत्रीय राजनीति में अपनी पहचान मजबूत की. छत्तीसगढ़ राज्य का गठन वर्ष 2000 में हुआ, जबकि साय दिसंबर 2023 में प्रदेश के मुख्यमंत्री बने.

चार बार सांसद और केंद्र में मंत्री

विष्णु देव साय 1999 में रायगढ़ लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए. इसके बाद वे 13वीं (1999), 14वीं (2004), 15वीं (2009) और 16वीं (2014) लोकसभा के सदस्य रहे. 27 मई 2014 से 2019 तक उन्होंने केंद्र सरकार में इस्पात, खान, श्रम और रोजगार मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में जिम्मेदारी निभाई.

साय ऐसे परिवार से आते हैं जिसकी राजनीति में पृष्ठभूमि रही है. उनके बड़े पिता नरहरि प्रसाद साय विधायक और बाद में सांसद रहे. उन्होंने केंद्र में संचार राज्यमंत्री के रूप में भी कार्य किया. केदारनाथ साय तपकरा से विधायक रहे, जबकि उनके दादा बुधनाथ साय 1947 से 1952 तक विधायक रहे थे.

लखीराम अग्रवाल का मार्गदर्शन

अविभाजित मध्यप्रदेश में भाजपा के वरिष्ठ नेता लखिराम अग्रवाल को साय का राजनीतिक मार्गदर्शक माना जाता है. कहा जाता है कि उन्होंने साय जैसे शांत और संगठननिष्ठ नेता को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. 1990 में विधानसभा टिकट दिलाने में भी उनका समर्थन निर्णायक रहा. साय को अक्सर उनका मानस पुत्र कहा जाता है. संगठनात्मक अनुशासन और विचारधारा के प्रति निष्ठा उनकी पहचान रही है.

2023 का चुनाव और सीएम पद तक का सफर

2023 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव से पहले साय को घोषणा पत्र समिति सहित कई अहम जिम्मेदारियां दी गईं. उन्होंने बस्तर और सरगुजा क्षेत्र में व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया. आदिवासी समाज से आने वाले साय को भाजपा की रणनीति के तहत प्रमुख चेहरा बनाया गया. पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के बाद नेतृत्व परिवर्तन के दौर में एक संतुलित और संगठननिष्ठ चेहरे की तलाश साय पर आकर रुकी.

चुनावी रैली के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का यह बयान कि “आप इन्हें जिताइये, इन्हें बड़ा आदमी हम बनाएंगे” चर्चा में रहा. राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार साय को पहले से प्रमुख जिम्मेदारी देने की रणनीति तैयार थी. दिसंबर 2023 में भाजपा की जीत के बाद उन्हें विधायक दल का नेता चुना गया और उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली.

‘अजातशत्रु’ छवि

विष्णुदेव साय को पार्टी के भीतर संतुलित और विवादों से दूर रहने वाले नेता के रूप में देखा जाता है. विभिन्न गुटों के बीच स्वीकार्यता उनकी सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है. राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यही छवि हाईकमान के लिए निर्णायक कारक बनी.

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