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धान बेचकर शिक्षा और दलहन की खेती की ओर बढ़ता आमदी की बिटावन बाई के परिवार का सफर

Chhattisgarh January 16, 2026 रिपोर्टर: shailesh
धान बेचकर शिक्षा और दलहन की खेती की ओर बढ़ता आमदी की बिटावन बाई के परिवार का सफर

धान बेचकर शिक्षा और दलहन की खेती की ओर बढ़ता आमदी की बिटावन बाई के परिवार का सफर

रायपुर : किसानों के हित में संचालित समर्थन मूल्य पर धान खरीदी व्यवस्था आज विश्वास और पारदर्शिता का प्रतीक बन चुकी है। इसी का जीवंत उदाहरण हैं धमतरी जिले के आमदी गांव की किसान श्रीमती बिटावन बाई ध्रुव, जिनके चेहरे की मुस्कान उनकी मेहनत और सुचारू व्यवस्था की सफलता की कहानी कहती है।

धान से मिली आय का एक बड़ा हिस्सा वे दलहन उत्पादन में निवेश करेंगी, जिससे उनकी आय में विविधता आए और मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहे। कुछ राशि से वे पुराने कर्ज का भुगतान कर आर्थिक बोझ भी कम करेंगी।

श्रीमती बिटावन बाई ध्रुव की यह कहानी बताती है कि शासन की किसान-हितैषी नीतियां जब ज़मीन पर प्रभावी ढंग से लागू होती हैं, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त होती है। धान से शुरू हुई उनकी यह यात्रा शिक्षा, दलहन उत्पादन और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदमों की सशक्त मिसाल है।

श्रीमती बिटावन बाई ध्रुव ने अपने साढ़े चार एकड़ खेत में मेहनत से धान की फसल तैयार की। इस वर्ष उन्होंने 92 क्विंटल धान का उत्पादन किया, जिसे लेकर वे आमदी सहकारी समिति पहुंचीं। सोसायटी में पहुंचते ही उन्हें ऑफलाइन टोकन की सुविधा सहजता से उपलब्ध हो गई। धान तौल, बारदाना, छाया और पेयजल जैसी व्यवस्थाएं समय पर और व्यवस्थित रूप से मिलने से उन्हें किसी प्रकार की असुविधा नहीं हुई।

श्रीमती ध्रुव बताती हैं कि पहले धान बेचने को लेकर चिंता रहती थी, लेकिन अब पूरी प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और किसान हितैषी हो गई है। समय पर धान खरीदी और भुगतान की उम्मीद ने किसानों का भरोसा शासन-प्रशासन पर और मजबूत किया है।

बिटावन बाई ने अपने परिवार के बारे में बताते हुए  कहती हैं कि उनके दो बेटे, बहू और नाती-पोते हैं। खेती ही उनके परिवार की आजीविका का मुख्य साधन है। धान बिक्री से प्राप्त राशि का उपयोग वे अपने नाती-पोते बच्चों की पढ़ाई में करेंगी, ताकि आने वाली पीढ़ी शिक्षित और आत्मनिर्भर बन सके। इसके साथ ही रबी मौसम में वे दलहन फसल, विशेषकर चने की खेती कर रही हैं।

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