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11 सीटों का वो अटल वादा, जिसने बदल दी छत्तीसगढ़ की तकदीर, जानें अलग राज्य बनने की इनसाइड स्टोरी

Chhattisgarh November 1, 2026 रिपोर्टर: shailesh
11 सीटों का वो अटल वादा, जिसने बदल दी छत्तीसगढ़ की तकदीर, जानें अलग राज्य बनने की इनसाइड स्टोरी

11 सीटों का वो अटल वादा, जिसने बदल दी छत्तीसगढ़ की तकदीर, जानें अलग राज्य बनने की इनसाइड स्टोरी

रायपुर : छत्तीसगढ़ आज अपना 26वां स्थापना दिवस बड़े ही धूमधाम से मना रहा है. इस गौरवशाली मौके पर राज्य निर्माण की वे ऐतिहासिक यादें ताजा हो गई हैं, जिन्होंने 26 साल पहले इस प्रदेश की तकदीर बदली थी. दरअसल, छत्तीसगढ़ को राज्य का दर्जा दिलाने में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की भूमिका सबसे खास रहा, जिन्होंने जनता के साथ मिलकर एक बड़ा संकल्प पूरा की था. आज भी राज्य की राजनीति में उनके उस ऐतिहासिक फैसले का असर साफ दिखाई देता है.

अटल जी का ऐतिहासिक वादा

भाजपा नेता सच्चिदानंद उपासने के अनुसार, 26 साल पहले जब छत्तीसगढ़ मध्य प्रदेश का हिस्सा था, तब वहां कांग्रेस का वर्चस्व था. उसी दौरान राम मंदिर आंदोलन तेज होने से राजनीतिक माहौल गरमा गया था. साल 1998-99 के लोकसभा चुनाव प्रचार के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी रायपुर के सप्रे शाला मैदान पहुंचे. वहां उन्होंने जनता से मांग की यदि भाजपा को 11 लोकसभा सीटें मिलती हैं, तो वे छत्तीसगढ़ को नया राज्य बनाएंगे.

चुनाव नतीजों में भाजपा को 11 में से 10 सीटों पर जीत मिली. जनता से मिले इस भारी समर्थन के बाद केंद्र में सरकार बनते ही अटल जी ने अपना वदा निभाया. अगस्त 2000 में संसद से अलग राज्य का प्रस्ताव पास हुआ और नवंबर 2000 में छत्तीसगढ़ एक नया राज्य बन गया.

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों की योजनाएं बनीं पहचान

जल संकट दूर करने वाली ‘जोगी डबरी’

छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी का कार्यकाल साल 2000 से 2003 तक था. उस समय राज्य में सूखे के कारण पानी की भीषण किल्लत थी. इस संकट से निपटने के लिए उन्होंने गांवों में छोटे गड्ढे और तालाब खुदवाने की मुहिम शुरू की, जिसे ‘जोगी डबरी’ नाम मिला.

डॉ. रमन सिंह: गरीबों को सस्ता राशन और ‘चाउर वाले बाबा’ की छवि

साल 2003 से 2018 तक लगातार 15 साल मुख्यमंत्री रहे डॉ. रमन सिंह को उनकी राशन (PDS) योजना के लिए याद किया जाता है. उनकी सरकार ने गरीब परिवारों को महज 1 और 2 रुपये किलो में चावल देना शुरू किया था. इस कल्याणकारी कदम के वजह से वे ‘चाउर वाले बाबा’ के नाम से लोकप्रिय हो गए.

भूपेश बघेल: ग्रामीण अर्थव्यवस्था को चमकाने वाला ‘गोबर मॉडल’

साल 2018 से 2023 तक मुख्यमंत्री रहे भूपेश बघेल ने गांवों और किसानों की आमदनी बढ़ाने पर जोर दिया. उनकी ‘गोधन न्याय योजना’ देशभर में चर्चा की विषय बनी, जिसके तहत सरकार ने 2 रुपये किलो में गोबर खरीदना शुरू किया.

विष्णु देव साय: महिलाओं को आर्थिक ताकत देती ‘महतारी वंदन योजना’

विष्णु देव साय की सरकार ने मार्च 2024 में ‘महतारी वंदन योजना’ की शुरुआत की. इसके तहत राज्य की पात्र विवाहित महिलाओं को हर महीने 1,000 रुपये की आर्थिक मदद सीधे उनके बैंक खाते में दी जा रही है.

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