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लामनी एवीयरी में नए मेहमानों का हुआ स्वागत : ब्लू गोल्ड मकाऊ और अफ्रीकन ग्रे पैरेट के आगमन से गुलजार हुआ परिसर ​

Chhattisgarh January 15, 2026 रिपोर्टर: shailesh
लामनी एवीयरी में नए मेहमानों का हुआ स्वागत : ब्लू गोल्ड मकाऊ और अफ्रीकन ग्रे पैरेट के आगमन से गुलजार हुआ परिसर  ​

लामनी एवीयरी में नए मेहमानों का हुआ स्वागत : ब्लू गोल्ड मकाऊ और अफ्रीकन ग्रे पैरेट के आगमन से गुलजार हुआ परिसर ​

रायपुर : जगदलपुर नगर के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल लामनी बर्ड पार्क में बुधवार का दिन प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों के लिए बेहद खास रहा। पार्क के प्राकृतिक सौंदर्य और जैव विविधता में चार चांद लगाने के लिए नए मेहमानों के रूप में विदेशी पक्षियों का आगमन हुआ है। बुधवार को एवीयरी में बेहद आकर्षक ‘ब्लू-एंड-गोल्ड मकाऊ’ और ‘अफ्रीकन ग्रे पैरेट’ को लाया गया, जिसके बाद से ही ये पक्षी पार्क में आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। इन नए आगंतुकों के आने से पार्क का पक्षी संग्रह अब और भी समृद्ध हो गया है। इस दौरान प्रकृति प्रेमियों, पर्यटकों सहित नागरिकों ने इन नए मेहमानों का उत्साह के साथ स्वागत किया।

लामनी बर्ड ​पार्क में पहुंचे इन नए मेहमानों में ‘ब्लू-एंड-गोल्ड मकाऊ’, जिसे आरा अराराौना भी कहा जाता है, मूल रूप से मध्य और दक्षिण अमेरिका के जंगलों और सवाना का निवासी है। अपनी बुद्धिमत्ता और चटख रंगों के लिए मशहूर इस तोते का ऊपरी हिस्सा गहरा नीला और निचला हिस्सा (पेट और छाती) चमकदार सुनहरा-पीला होता है, जो इसे अद्भुत सौंदर्य प्रदान करता है। इसके सिर पर हरा रंग और चोंच के पास काले पंखों से सजी सफेद त्वचा इसकी विशिष्ट पहचान है। लगभग 34 से 36 इंच की लंबाई और 41 से 45 इंच के पंखों के फैलाव वाले ये विशाल तोते न केवल देखने में सुंदर हैं, बल्कि इंसानों की तरह बातचीत करने में भी सक्षम हैं। इनके साथ ही आया ‘अफ्रीकन ग्रे पैरेट’ अपनी सटीक नकल करने की क्षमता के लिए दुनिया भर में जाना जाता है, जो पर्यटकों विशेषकर बच्चों के लिए मनोरंजन का एक नया जरिया बनेगा।

बस्तर वनमंडलाधिकारी श्री उत्तम कुमार गुप्ता ने बताया कि मकाऊ और अफ्रीकन ग्रे पैरेट पालतू पक्षी के रूप में बहुत लोकप्रिय हैं क्योंकि ये बहुत सामाजिक, बुद्धिमान और चंचल होते हैं। उन्होंने जानकारी दी कि ये पक्षी शब्दों और वाक्यांशों को दोहरा सकते हैं और अपने मालिकों के साथ गहरा भावनात्मक जुड़ाव बना लेते हैं। हालांकि इन्हें बहुत अधिक ध्यान, उचित पोषण और देखभाल की आवश्यकता होती है, क्योंकि इनकी चोंच बहुत मजबूत होती है और ये मेवे तोड़ने में सक्षम होते हैं।

सबसे खास बात यह है कि ये पक्षी लंबे समय तक जीवित रहते हैं और इनकी आयु 80 साल तक हो सकती है, इसलिए इनका पालन-पोषण एक बड़ी जिम्मेदारी का काम है। लामनी पार्क में इन विदेशी पक्षियों के आगमन से उम्मीद है कि शहरवासी और पर्यटक, विशेषकर बच्चे, इन रंग-बिरंगे और बातूनी पक्षियों को करीब से देखने के लिए बड़ी संख्या में यहां पहुंचेंगे।

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