गुरु पूर्णिमा 29 को : 56 वर्ष बाद दुर्लभ संयोग, बुधादित्य सहित शश और हंस राजयोग

रायपुर। 56 साल बाद गुरु पूर्णिमा पर दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस वर्ष गुरु पूर्णिमा पर बुधादित्य राजयोग बन रहा है। सूर्य और बुध की युति से यह योग प्रभावी होगा। इसके अलावा शश राजयोग और हंस राजयोग जैसे शक्तिशाली संयोग भी बन रहे हैं। ये योग बौद्धिक क्षमता, करियर और मान-सम्मान में वृद्धि करते हैं।
आषाढ़ पूर्णिमा को मनाई जाने वाली गुरु पूर्णिमा सनातन परंपरा में गुरु सम्मान और ज्ञान की साधना का महापर्व है। इस वर्ष यह तिथि ज्योतिषीय दृष्टि से भी अत्यंत विशेष और शुभ मानी जा रही है।
ज्योतिष शास्त्र में इन योगों को मान-सम्मान
ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, ग्रहों की विशेष स्थिति हंस और शश राजयोग को भी प्रभावी बनाएगी। ज्योतिष शास्त्र में इन योगों को सफलता, ज्ञान, प्रतिष्ठा और उन्नति का कारक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी पावन तिथि पर महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था, इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है।
मान्यता है कि
भगवान शिव ने इसी दिन आदि गुरु के रूप में सप्तऋषियों को योग का ज्ञान प्रदान किया था। वहीं भगवान बुद्ध ने भी सारनाथ में अपना प्रथम उपदेश इसी तिथि पर दिया था। इस दिन गुरु, माता-पिता और वरिष्ठजनों का सम्मान कर उनका आशीर्वाद लेना विशेष शुभ माना जाता है।
शुभ मुहूर्त और पूजा का समय
- पूर्णिमा तिथि प्रारंभः 28 जुलाई, शाम 6:18 बजे
- पूर्णिमा तिथि समाप्तः 29 जुलाई, रात 8:05 बजे
- गुरु पूर्णिमा पर्वः 29 जुलाई (उदया तिथि के अनुसार)
- सत्यनारायण कथा एवं गुरु पूजन का शुभमुहूर्तः प्रातः 5:41 बजे से 9:47 बजे तक
फलदायी रहेगी कथा
इस शुभ मुहूर्त में गुरु पूजन, मंत्र जाप, ध्यान, दान-पुण्य और सत्यनारायण कथा करना अत्यंत फलदायी माना गया है। वैदिक ज्योतिष में बुधादित्य, हंस और शश राजयोग को अत्यंत प्रभावशाली योग माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों और ज्योतिषीय परंपराओं के अनुसार ऐसे योग व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव और अवसरों को बढ़ावा दे सकते हैं। शहर के मंदिरों सहित गुरु-शिष्य परंपरा का पालन करने वाले आश्रमों में भी इसे लेकर तैयारियां प्रारंभ कर दी गई हैं।