एलपीजी से लेकर जमीन की रजिस्ट्री और बैंकिंग तक…छत्तीसगढ़ में 1 फरवरी से बदल गये ये नियम, पड़ेगा आप पर असर

रायपुर : देश भर समेत छत्तीसगढ़ में भी1 फरवरी 2026 से कई नियमों में बदलाव हो गया है. जिसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा. इसमें LPG गैस की कीमतों से लेकर जमीन रजिस्ट्री और बैंकिंग जुड़े नियम शामिल हैं. आइए 1 फरवरी यानी आज से लागू होने वाले इन 5 बड़े बदलावों के बारे में जानते हैं.
एलपीजी गैस के बढ़े दाम
फरवरी महिने के पहले दिन एल पीजी सिलेंडर के उपभोक्ताओं को बड़ा झटका लगा है.
देशभर समेत छत्तीसगढ़ में कॉमर्शियल एलपीजी (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) सिलेंडर और घरेलू सिलेंडर के रेट आज 1 फरवरी 2026 अपडेट किए गए हैं.
कॉमर्शियल सिलेंडर के उपभोक्ताओं को दिल्ली से पटना तक करीब 50 रुपये का तेज झटका लगा है. जबकि, घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम में कोई बदलाव नहीं हुआ है.
जमीन की रजिस्ट्री में भी बड़ा बदलाव
1 फरवरी से जमीन और प्रॉपर्टी की खरीद फरोख्त में आधार वेरिफिकेशन अनिवार्य कर दिया गया है.
अब रजिस्ट्री के समय केवल खरीदार और विक्रेता ही नहीं, बल्कि गवाहों का भी आधार वेरिफिकेशन मौके पर ही किया जाएगा.
इसके अलावा सभी उप निबंधक कार्यालयों में बायोमेट्रिक मशीनें लगा दी गई है, जिन्हें UIDAI के सर्वर से जोड़ा गया है. जैसे ही पक्षकार अंगूठा लगाएंगे, पहचान की तुरंत पुष्टि होगी. पहचान सही होने पर ही रजिस्ट्री की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी.
फरवरी में 2 महिने का मिलेगा राशन
छत्तीसगढ़ के राशन कार्ड धारकों के लिए खुशखबरी है. यहां फरवरी के महिने में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत प्रदेश के 82 लाख राशन कार्ड धारकों को फरवरी 2026 में ही दो महीने का चावल एकमुश्त दिया जाएगा. सभी कलेक्टरों और राज्य नागरिक आपूर्ति निगम को निर्देश दिए गए हैं कि वितरण व्यवस्था समय पर और सुचारू रूप से सुनिश्चित की जाए.
बैंक में कितने दिन रहेगी छुट्टी?
फरवरी महीने की शुरुआत बैंक छुट्टी के साथ होगी. RBI की हॉलिडे लिस्ट के मुताबिक, साप्ताहिक अवकाश और छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती जैसे अवसरों को मिलाकर इस महीने करीब 10 दिन बैंक बंद रहेंगे. ऐसे में बैंक से जुड़े जरूरी काम पहले से प्लान करना बेहतर रहेगा.
तंबाकू उत्पादों पर बढ़ेगा टैक्स
बता दें कि सरकार ने पान-मसाला, सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों पर नए उत्पाद शुल्क और उपकर (Cess) लगाने का फैसला किया है. इसके लागू होते ही इन उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी तय मानी जा रही है. सरकार का उद्देश्य न सिर्फ राजस्व बढ़ाना है, बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से इन उत्पादों की खपत को भी हतोत्साहित करना है.