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बिना अपराध की जानकारी के डॉक्टरों पर पॉक्सो केस गलत, हाई कोर्ट ने महिला रेडियोलॉजिस्ट के खिलाफ मामला किया रद्द

Chhattisgarh July 23, 2026 रिपोर्टर: shailesh
बिना अपराध की जानकारी के डॉक्टरों पर पॉक्सो केस गलत, हाई कोर्ट ने महिला रेडियोलॉजिस्ट के खिलाफ मामला किया रद्द

बिना अपराध की जानकारी के डॉक्टरों पर पॉक्सो केस गलत, हाई कोर्ट ने महिला रेडियोलॉजिस्ट के खिलाफ मामला किया रद्द

बिलासपुर : छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट डॉक्टरों के हित में बड़ी टिप्पणी की है. अदालत ने पोक्सो एक्ट के तहत डॉक्टरों की जवाबदेही को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि केवल नाबालिग सोनोग्राफी करने मात्र से यह नहीं माना जा सकता कि डॉक्टर को यौन अपराध की जानकारी थी. यानी कि जब तक यह साबित न हो की डॉक्टर को पहले से अपराध के बारे में पता था, तब तक उसके खिलाफ पोस्को एक्ट की धारा-21 के तहत मामला नहीं बनता है.

बता दें कि नाजनांदगांव की रेडियोलाजिस्ट डा. आरती उइके के खिलाफ दायर पूरक आरोपपत्र और विशेष अदालत डोंगरगढ़ द्वारा 11 मार्च 2026 को पारित संज्ञान आदेश निरस्त कर दिया गया. ये फैसला मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की युगलपीठ ने सुनाया है.

पुलिस ने आरोप को किया था गिरफ्तार

दरअसल बीते दिनों राजनांदगांव के बोरतलाव थाना क्षेत्र में 15 वर्षीय किशोरी के 8 माह के गर्भवती होने का मामला सामने आया था. पुलिस ने इस मामले में आरोपी के खिलाफ पोस्को एक्ट के तरह मुकदमा दर्ज किया था इसी के साथ ही पुलिस ने सोनोग्राफी करने वाली डॉक्टर आरती उइके पर भी यही आरोप लगाते हुए आरोपी बना दिया.

आरती उइके ने दायर की थी याचिका

इसके बाद उइके ने याचिका दायर की थी जिसमें कहा गया था कहा गया कि उन्होंने पीसी-पीएनडीटी एक्ट के सभी वैधानिक प्रावधानों का पालन किया था और रिकार्ड में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जिससे यह साबित हो कि उन्हें किसी यौन अपराध की जानकारी थी. इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने ये फैसला सुनाया है.

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