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म्‍यांमार और श्रीलंका से भारत की मिसाइलों और सैटेलाइट की जासूसी करने की साजिश में चीन! ड्रैगन का खतरनाक डबल गेम

बीजिंग: चीन, भारत का वह पड़ोसी जो हमेशा उसके लिए सिरदर्द बना रहता है। अब इसी पड़ोसी की तरफ से म्‍यांमार और श्रीलंका में जो कुछ किया जा रहा है, उसकी वजह से भारत में सुरक्षा विशेषज्ञ खासे चिंतित हैं। श्रीलंका और म्‍यांमार में चीन वह दोहरा खेल खेल रहा है जिसके बाद भारत पर खतरा बढ़ सकता है। जहां म्‍यांमार में उसने कोको द्वीप पर एक सैन्य सुविधा तैयार कर डाली है तो वहीं अब वह श्रीलंका में एक रिमोट सैटेलाइट रिसीविंग ग्राउंड स्टेशन सिस्टम बनाने की तैयारी में है। म्‍यांमार और श्रीलंका में दोनों ही सुविधाओं के लिए चीन की मदद मिल रही है। भारत को चिंता है कि चीन ऐसा करके पूरे क्षेत्र में नजर रखना चाहता है, इसकी निगरानी करना चाहता है।

श्रीलंका में बनेगा सैटेलाइट स्‍टेशन!

अखबार द हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक हाल ही में कोको द्वीप समूह की कुछ सैटेलाइट तस्‍वीरें आई हैं। इनमें साफ नजर आ रहा है कि इस जगह पर चीन की एक सैन्‍य सुविधा अंडमान निकोबार द्वीप समूह के एकदम करीब है। इससे अलग सूत्रों की मानें तो चीन की साइंस एकेडमी के तहत आने वाले एयरोस्‍पेस इनफॉर्मेशन रिसर्च इंस्‍टीट्यूट और दक्षिणी श्रीलंका की रुहुना युनिवर्सिटी के बीच एक रिमोट सैटेलाइट रिसीविंग ग्राउंड स्‍टेशन सिस्‍टम बनाने की तैयारी की जा रही है। भारतीय रक्षा संगठनों से जुड़े सूत्रों की मानें तो जिस जगह पर यह स्‍टेशन बनाने का प्रस्‍ताव दिया गया है वह काफी महत्‍वपूर्ण है। ऐसे में चीन इसका प्रयोग भारतीय संपत्तियों की जासूसी करने और संवेदनशील सूचनाओं को इंटरसेप्‍ट करने के लिए कर सकता है।

कोको आइलैंड तक चीन के कदम

सूत्रों की मानें तो अंडमान और निकोबार द्वीप समूह से करीबी 60 किलोमीटर दूर कोको द्वीप समूह में चीन की तरफ से बनाए जा रहे मिलिट्री स्‍टेशन के बारे में मिली इंटेलीजेंस का जिक्र किया है। रक्षा सूत्रों की मानें तो ऐसे में चीन जो कुछ भी कर रहा है, उसके बाद चिंताएं होना लाजिमी है। हाल ही में सैटेलाइट तस्‍वीरों में द्वीप पर एक रेडोम देखा गया था। रेडोम यानी रडार की रक्षा के लिए गुंबद के आकार का ढांचा। सूत्रों के मुताबिक द्वीप को एक नए पुल के जरिए करके हिस्‍से से जोड़ा जा रहा है। इसकी लंबाई 175 मीटर और चौड़ाई करी आठ मीटर है। रक्षा सूत्रों की मानें तो जरूरत पड़ने पर चीनी सेना हमेशा इस सुविधा का इस्तेमाल कर सकती है।

अंडमान के करीब कोको द्वीप

पिछले दिनों लंदन स्थित थिंक टैंक चैथम हाउस ने मैक्सार टेक्नोलॉजीज की सैटेलाइट तस्‍वीरों पर एक रिपोर्ट जारी की थी। यह रिपोर्ट जनवरी 2023 की सैटेलाइट तस्‍वीरों पर आधारित थी। इन तस्‍वीरों में रणनीतिक तौर पर महत्‍वपूर्ण कोको आईलैंड पर बड़े पैमाने पर निर्माण की गतिविधियां नजर आई थीं। इनमें दो नए हैंगर, एक नया रास्‍ता और एक घर जैसा ब्‍लॉक नजर आ रहा था। ये सभी नए बने 2,300 मीटर के रनवे और रडार स्टेशन के करीब नजर आ रहे थे। रिपोर्ट में कहा गया था मार्च के अंत में नजर आने वाले ये सभी निर्माण ग्रेट कोको के दक्षिणी हिस्‍से पर थे। यह वह हिस्‍सा है जो अंडमान को जोड़ने वाले पुल के ठीक सामने है।

भारत की मिसाइल पर रहेगी नजर!

चीन सन् 1990 के दशक से ही एक सिग्‍नल इंटेलीजेंस सेंटर को ऑपरेट करता आ रहा है। विशेषज्ञों की मानें तो चीन की सैटेलाइट ट्रैकिंग सुविधाएं दोहरे प्रयोग वाली हैं। चीनी नागरिक अंतरिक्ष कार्यक्रम को चीनी सेना के साथ मिलकर चलाया जाता है। ऐसे में इस क्षेत्र में चीन के विस्तार वाले ग्राउंड स्टेशनों का उपयोग निश्चित तौर पर भारत से जुड़ी संवेदनशील जानकारी को हासिल करने के लिए बाधित करने के लिए किया जा सकता है। सूत्रों की मानें तो श्रीहरिकोटा में भारत की सैटेलाइट लॉन्चिंग फैसिलिटी और ओडिशा में इंटीग्रेटेड मिसाइल टेस्‍ट रेंज पर चीनी ग्राउंड स्टेशन नजर रख सकता है। वह श्रीलंका में बनने वाले रिमोट स्‍टेशन की मदद से संवेदनशील डेटा हासिल कर लॉन्च को ट्रैक कर सकता है।

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