अब देश के बच्चे पढ़ेंगे छत्तीसगढ़ का इतिहास, कोर्स में मुकुटधर पांडेय, सप्रे और ‘गंगाराम मगरमच्छ’ की होगी कहानी

रायपुर : छत्तीसगढ़ अपनी अनोखी संस्कृति, कला और इतिहास के लिए प्रसिध्द है. वहीं अब देश में पढ़ने वाले करोड़ों बच्चे छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, महान साहित्यकारों और यहां की अनोखी लोक-कथाओं से रूबरू होंगे. राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद द्वारा तैयार की जा रही कक्षा 5वीं और 8वीं की नई किताबों विशेषकर सामाजिक विज्ञान में राज्य से जुड़ी सामग्री को प्रमुखता से शामिल किया गया है.

बच्चे मुकुटधर पांडेय, सप्रे और ‘गंगाराम मगरमच्छ’ की पढ़ेंगे कहानी

नए सिलेबस में छायावाद के जनक पंडित मुकुटधर पांडेय और हिंदी पत्रकारिता के शलाका पुरुष पंडित माधवराव सप्रे की जीवनी को जगह दी गई है. शिक्षकों के लिए भी एनसीईआरटी ने राहत भरा कदम उठाया है. पहले सामाजिक विज्ञान में 22 पाठ हुआ करते थे, जिन्हें अब घटाकर 12 पाठों में समेट दिया गया है.

ये बड़े बदलाव

‘गंगाराम’ मगरमच्छ: इंसान और बेजुबान की अनूठी मिसाल: बेमेतरा जिले के बावा मोहतरा गांव के चर्चित मगरमच्छ ‘गंगाराम’ की कहानी कक्षा 5वीं के बच्चे पढ़ेंगे. 100 साल से अधिक उम्र का यह मगरमच्छ गांव के तालाब में रहता था, लेकिन ग्रामीणों, महिलाओं और बच्चों के साथ उसका आत्मीय रिश्ता ऐसा था कि उसने कभी किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया.

‘जो जीता वही सिकंदर’ की जगह ‘जो जीता वही बाजीराव’: पाठ “जो जीता वही बाजीराव” के नाम से जाना जाएगा. पेशवा बाजीराव ने अपने 40 वर्ष के जीवनकाल में 40 युद्ध लड़े और सभी में जीते.

इन महापुरुषों को मिला प्रमुख स्थान

पंडित मुकुटधर पांडेय की जीवनी को कक्षा 8वीं में शामिल किया गया है, वहीं पंडित माधवराव सप्रे का पाठ अब 6वीं की जगह 8वीं कक्षा के सिलेबस का हिस्सा होगा. इसके साथ ही पिछले कुछ वर्षों से किताबों में उपेक्षित रहे राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रीय भाषा और राष्ट्रीय चिह्नों से जुड़े अध्यायों को पुनः गरिमा के साथ प्रमुखता से जोड़ा गया है.

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