CG News: चनाबूट बेचकर किसान ने बदली अपनी किस्मत : एक एकड़ में 36-38 हज़ार रुपए तक कमा रहा, हो रहा दुगुना फायदा

कुरुद। CG News: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में फसल चक्र परिवर्तन से किसानों को होने वाला फायदा अब दिखने लगा है। गर्मी के धान के बदले दलहनी-तिलहनी और नगदी फसलों की खेती से किसानों को अब कम दिनों में ही दोहरा फायदा हो रहा है। किसानों की खेती की लागत भी कम हुई है, साथ ही भारी मात्रा में पानी की भी बचत हुई है।

CG News: जिले के चना उत्पादक किसानों ने केवल चनाबूट बेचकर ही एक एकड़ फसल से 36-38 हज़ार रुपए तक का शुद्ध मुनाफा कमाया है। चनाबूट को किसान हाईवे के किनारे दुकान लगाकर, स्थानीय बाज़ार और मंडी में थोक और चिल्लर रूप में बेचकर अच्छा फायदा ले रहे है। मगरलोड विकासखंड के कुंडेल गांव के किसान रामनाथ ने दो-सवा दो महीने में ही लगभग 84 हज़ार रुपए का चनाबूट बेचा है और इस पर खेती की काश्त आदि खर्चे निकाल कर एक एकड़ से 36-38 हज़ार रुपए तक मुनाफा कमाया है। जिले में इस बार लगभग साढ़े पंद्रह हज़ार हेक्टेयर में चने की फसल लगी है। चार से पाँच हज़ार हेक्टेयर की फसल को किसानों ने चनाबूट के रूप में 40 रूपये किलो के दाम पर बेचा है और अच्छा फ़ायदा लिया है। धमतरी विकासखण्ड के खरतुली गांव में रहने वाले चैतुराम ने तीन एकड़ में चने की फसल लगाई और चनाबूट के रूप में 38 रुपये प्रति किलो की दर से बेचकर एक लाख 16 हज़ार रुपये से अधिक का लाभ कमाया।

धान के बदले की चने की खेती 

CG News:  खुद रामनाथ बताते हैं कि, उनके पास दो एकड़ खेत है, जिसमें खरीफ के दौरान धान की फसल लगाई गई थी। इसके बाद कृषि विभाग और जिला प्रशासन की समझाईश और मदद से उन्होंने ढेड़ एकड़ रकबे में रबी मौसम में धान के बदले चना की खेती की। रामनाथ ने बताया कि 70-80 दिन में ही चने में फल आ गया और उसे जड़ से उखाड़ कर चनाबूट के रूप में हाइवे के किनारे दुकान के साथ मंडी और लोकल बाज़ार में 35-40 रुपए किलो के भाव से बेच दिया। उन्होंने बताया कि डेढ़ एकड़ रकबे में दो हज़ार 100 किलो चनाबूट हुआ जिसको 40 रुपए किलो के भाव से बेचने पर 84 हज़ार रुपए मिले। रामनाथ ने बताया कि इस राशि से फसल की काश्त लागत लगभग तीस हज़ार रुपए घटा देने पर उन्हें शुद्ध रूप में 54 हज़ार रुपए का मुनाफा हुआ है।

चना स्वास्थ्य के लिए बेहतर 

CG News: चनाबूट की मिठास बसंत के मौसम में लोगों को बहुत भाती है साथ ही इसमें मिलने वाले 9 प्रतिशत प्रोटीन, 10 प्रतिशत फाइबर और प्रचुर मात्रा में कैल्शियम, मैग्नीशियम तथा फ़ास्फोरस इसे पौष्टिक भी बनाते है। रामनाथ बताते है कि अब खेत भी 70-80 दिन में ही खाली हो गया है और तीसरी फसल लेने के लिए तैयार करने का भी पर्याप्त समय मिल रहा है। रामनाथ इस बार उड़द-मूंग को तीसरी फसल के रूप में लगाने की योजना बना रहे है। चना की खेती करने वाले खरतूली के किसान चैतुराम ने बताया की तीन एकड़ में लगे चना बूट को 38 रुपये किलो के भाव से बेचकर एक लाख 76 हजार रुपए से अधिक का व्यवसाय किया और लागत घटाकर एक लाख 16 हज़ार रुपए का शुद्ध मुनाफा कमाया।

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