जनसंपर्क विभाग में विज्ञापन घोटाला : भावना बोहरा ने सदन में उठाया मामला, अखबारों, न्यूज चैनलों और पोर्टलों को कितने का विज्ञापन मिला ?

रायपुर। विधायक भावना बोहरा ने जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी विज्ञापन में अनियमितता का मुद्दा उठाया। उन्होंने मामले की जांच कराने ने मांग की है। विभाग ने पिछले चालू वित्तीय वर्ष के लिए लगभग 450 करोड़ के विज्ञापन अखबारों, न्यूज चैनलों, रेडियो, न्यूज पोर्टल्स के लिए बजट दिया था। लेकिन 31 जनवरी तक विभाग में लगभग डेढ़ सौ करोड़ का ही विज्ञापन जारी किया है। अभी विभाग के पास 3 सौ करोड़ का बजट बचा हुआ है। इसे आखिरी महीने में बंदरबाट करने की तैयारी है।

जनसंपर्क एवं प्रचार प्रसार के संबंध में प्रश्न करते हुए भावना बोहरा ने पूछा कि प्रदेश में जनसंपर्क विभाग के अंतर्गत प्रदेश के कुल कितने समाचार पोर्टल और कितने राष्ट्रीय समाचार पोर्टल पंजीकृत हैं ? वित्तीय वर्ष 2023-24 व 2024-25 में दिनांक 31/01/2025 तक राज्य सरकार द्वारा डिजिटल समाचार पोर्टल्स, समाचार पत्रों, टीवी चैनलों और रेडियो स्टेशनों को कितने सरकारी विज्ञापन जारी किए और कितनी राशि आवंटित की गई ? डिजिटल मीडिया और समाचार पोर्टल्स के लिए पंजीकरण एवं सरकारी विज्ञापन प्राप्त करने की क्या मानक प्रक्रिया है ? क्या पिछले 1 वर्ष में इस प्रक्रिया में कोई बदलाव किया गया है ? इसके जवाब में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अधिकारियों द्वारा बनाए लिखित जवाब पेश किया, जिसमें बताया गया है कि जनसंपर्क विभाग द्वारा न्यूज पोर्टल्स का पंजीकरण नहीं किया जाता है।

राज्य शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए समाचार पोर्टल्स का इम्पेनल किया जाता है। वर्तमान में प्रदेश के कुल 243 समाचार पोर्टल इम्पेनल हैं। वित्तीय वर्ष 2023-24 में कुल डिजिटल पोर्टल्स में 3189 विज्ञापन जारी किए गए और 67 करोड़, 16 लाख 89 हजार 759 रुपए का भुगतान किया गया। इसी तरह समाचार पत्रों के लिए 12,881 विज्ञापन जारी किया गया और  147 खरीद 36 लाख 54 हजार 282 रुपए अखबारों को भुगतान किया गया है। इसी तरह टी.वी.चैनलों में कुल 901 विज्ञापन जारी किए गए और 140 करोड़ 93 लाख 32 हजार 923 रुपए भुगतान किया गया इसी तरह रेडियो स्टेशन के लिए 187 विज्ञापन जारी किए गए और  5 करोड़, 29 लाख 55 हजार 891 रुपए जारी किया गया। जबकि वर्ष 2024-25 में 31 जनवरी तक न्यूज पोर्टल्स में 1986 विज्ञापन जारी किया गया है और 13 करोड़ 16 लाख 27 हजार 516 रुपए,  समाचार पत्रों हेतु 8379 विज्ञान के 59 करोड़ 20 लाख 52 हजार 884 रुपए, टी.वी.चैनलों में कुल 597 विज्ञापन हेतु 58 करोड़ 52 लाख, 43 हजार 484 रुपए एवं रेडियो स्टेशन में 145 विज्ञापन हेतु 2 खरीद 71 करोड़ 31 हजार 424 रुपए आवंटित किये गए हैं। सदन को यह भी बताया गया कि जनसंपर्क विभाग द्वारा न्यूज पोर्टल का पंजीकरण नहीं किया जाता है। प्रचार-प्रसार की सुविधा की दृष्टि से न्यूज पोर्टल का इम्पैनलमेंट किया जाता है। विज्ञापन नियमावली-2019 यथा संशोधित नियम- 2020 के अंतर्गत विज्ञापन स्वीकृत किए जाते हैं। पिछले एक वर्ष में इस प्रकिया में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

इस पर भावना बोहरा ने प्रश्न किया कि पूर्ववर्ती सरकार द्वारा एक वर्ष में विगत वर्ष की तुलना लगभग दोगुना राशि विज्ञापन हेतु आवंटित की है, कहीं न कहीं यह सरकारी पैसों का दुरूपयोग है,  इसकी जांच होनी चाहिए। कई शिकायतें भी मिली हैं की विज्ञापन हेतु होर्डिंग्स के लिए 3 महीने का अनुबंध किया जाता है परन्तु एक माह में ही होर्डिंग हटा दिया जाता है और भुगतान पूरे 3 महीने का किया गया है। इस मद में भुगतान की गई राशि की जांच होनी चाहिए। डिजिटल समाचार पोर्टल हेतु 243 पोर्टल को इम्पेनल किया गया है क्या उसके लिए 243 टेंडर जारी किया गया है। जिसके प्रतिउत्तर में जवाब दिया गया कि 243 टेंडर जारी किया गया है और होर्डिंग के विषय में कोई जानकारी उपलब्ध कराई जाती है तो उसका परिक्षण कराया जाएगा।

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