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छत्तीसगढ़ की अनोखी परंपरा, यहां होली पर पहनाई जाती है ‘हरवा माला’, जानें क्यों है इतनी खास

Chhattisgarh February 27, 2026 रिपोर्टर: shailesh
छत्तीसगढ़ की अनोखी परंपरा, यहां होली पर पहनाई जाती है ‘हरवा माला’, जानें क्यों है इतनी खास

छत्तीसगढ़ की अनोखी परंपरा, यहां होली पर पहनाई जाती है ‘हरवा माला’, जानें क्यों है इतनी खास

रायपुर : छत्तीसगढ़ में रंगों के त्यौहार होली को मनाने की अलग-अलग परंपरा है. यहां मीठे हरवा माला पहनने और इसे भाई-चारा के प्रतीक के रूप में एक-दूसरे को पहनाना और उसमें गुथे बताशे को खिलाने की परंपरा है. होली उत्साह, उमंग व रंगों का त्योहार है. हर उम्र के लोग इसे बड़े उत्साह से मनाते है.

यहां मीठे हरवा माला (बताशे की मीठाई) पहनने और इसे भाई-चारा के प्रतीक के रूप में एक-दूसरे को पहनाना और उसमें गुथे बताशे को खिलाने की परंपरा है. खास बात यह है कि आज भी यह परंपरा जीवित है. इसी वजह से होली बाजार में हरवा मिठाई की दुकान भी सजती है.

हरवा मिठाई की माला एक-दूसरे को पहनाकर और खिलाकर इस पर्व की शुरूआत करते हुए रंगों की होली मनाएंगे. होली में रंगों का जितना महत्व है. उतना ही महत्व छत्तीसगढ़ की पारंपरिक मीठाई हरवा का भी है.

लोगों का कहना है कि होली के दिन देवता को हरवा मिठाई का भोग लगाया जाता है. पूजा के बाद एक दूसरे को हरवा का माला पहनाते हैं. इसके बाद होली खेलने की शुरुआत होती है, लेकिन आधुनिकता के इस दौर में अब इसका चलन कम हो गया है.

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