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उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में हॉर्नबिल रेस्टोरेंट की अनोखी पहल, मालाबार पाइड हॉर्नबिल संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम

Chhattisgarh February 9, 2026 रिपोर्टर: shailesh
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में हॉर्नबिल रेस्टोरेंट की अनोखी पहल, मालाबार पाइड हॉर्नबिल संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में हॉर्नबिल रेस्टोरेंट की अनोखी पहल, मालाबार पाइड हॉर्नबिल संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम

गरियाबंद : उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR) में जैव विविधता संरक्षण की दिशा में एक सराहनीय और अभिनव पहल देखने को मिल रही है। यहां मालाबार पाइड हॉर्नबिल जैसे दुर्लभ और आकर्षक पक्षी के संरक्षण के लिए “हॉर्नबिल रेस्टोरेंट” की शुरुआत की जा रही है। यह पहल वैज्ञानिक दृष्टिकोण, सामुदायिक सहभागिता और पर्यावरणीय संतुलन का बेहतरीन उदाहरण बनकर उभर रही है।

मालाबार पाइड हॉर्नबिल आमतौर पर पश्चिमी घाट के सदाबहार जंगलों में पाया जाता है, लेकिन उदंती–सीतानदी टाइगर रिजर्व की पहाड़ी भौगोलिक संरचना, 800 से 1000 मीटर की ऊंचाई और अनुकूल सूक्ष्म जलवायु ने इसे यहां पनपने का अवसर दिया है। यही कारण है कि यह क्षेत्र अब मध्य भारत में जैव-भौगोलिक सेतु के रूप में पहचाना जा रहा है।

हॉर्नबिल की बढ़ती मौजूदगी

वन विभाग के अनुसार वर्ष 2023 में जहां हॉर्नबिल के केवल 1–2 दर्शन प्रतिमाह होते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर सप्ताह में 2–3 बार हो गई है। पक्षी अब गांवों के पास फाइकस प्रजाति के पेड़ों पर भोजन करते हुए भी देखे जा रहे हैं, जो इस प्रजाति के लिए सुरक्षित वातावरण का संकेत है

क्या हैं ‘हॉर्नबिल रेस्टोरेंट’

USTR प्रशासन गांवों के आसपास खाली स्थानों पर पीपल और बरगद जैसे फाइकस प्रजाति के फलदार पेड़ लगाने जा रहा है, जिन्हें “हॉर्नबिल रेस्टोरेंट” नाम दिया गया है। ये पेड़ सालभर फल देते हैं, जिससे हॉर्नबिल को पर्याप्त भोजन मिलेगा और साथ ही इको-टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलेगा

सामुदायिक भागीदारी और सुरक्षा

संरक्षण के तहत अवैध अतिक्रमण हटाने, शिकार-रोधी अभियानों और वनाग्नि नियंत्रण जैसे ठोस कदम उठाए गए हैं। इसके अलावा स्थानीय युवाओं और वन-मित्रों को शामिल कर हॉर्नबिल ट्रैकर टीम बनाई गई है, जो घोंसलों की निगरानी और पक्षियों के संरक्षण में अहम भूमिका निभा रही है , मालाबार पाइड हॉर्नबिल को जंगल का “बीज संवाहक” माना जाता है। यह बड़े बीज वाले फलों को खाकर उनके बीज दूर-दराज क्षेत्रों में फैलाता है, जिससे जंगलों का पुनर्जीवन और जैव विविधता बनी रहती है।

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