चीन के राष्ट्रपति ने अमेरिका का नाम लेकर बोला हमला, कहा- हमें घेरने की कोशिश हो रही

बीजिंग : बीते दिनों जासूसी गुब्बारे के मुद्दे पर चीन और अमेरिका के रिश्तों में तनाव का माहौल है। दोनों देशों के बीच का यह तनाव अब दुश्मनी की तरफ बढ़ता दिख रहा है। दरअसल चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपने एक भाषण में अमेरिका का नाम लेकर उसकी आलोचना की। चीन के राष्ट्रपति ने कहा कि ‘अमेरिका के नेतृत्व में पश्चिमी देश हमें चारों तरफ से घेरने और दबाने का प्रयास कर रहे हैं। इससे चीन के विकास के सामने अभूतपूर्व चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।’

खास बात ये है कि अभी तक चीन के राष्ट्रपति अपने बयानों में अमेरिका पर सीधा हमला बोलने से बचते थे लेकिन ताजा भाषण में उन्होंने अमेरिका की सीधे आलोचना की। चीन की मुख्य राजनीतिक सलाहकार समिति की बैठक के दौरान शी जिनपिंग ने ये बातें कही। शी जिनपिंग ने कहा कि बीते पांच सालों से अमेरिका द्वारा चीन के विकास को दबाने और बाधित करने की कोशिश की जा रही है।

राष्ट्रीय सुरक्षा पर जोर और नीतियों की वजह से चीन की अर्थव्यवस्था को नुकसान

उल्लेखनीय है कि निवेशक शी जिनपिंग पर आरोप लगा रहे हैं कि उनके राष्ट्रीय सुरक्षा पर जोर और नीतियों की वजह से चीन की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा है। ऐसे में माना जा रहा है कि शी जिनपिंग ने लोगों का ध्यान उनकी नीतियों से हटाने के लिए इस तरह का बयान दिया है। कोविड प्रोटोकॉल की सख्ती को लेकर भी शी जिनपिंग आलोचकों के निशाने पर हैं। अपने भाषण में शी जिनपिंग ने देश के निजी क्षेत्र के आत्मविश्वास को बढ़ाने पर भी जोर दिया क्योंकि चीन में निजी क्षेत्र ही विकास का मुख्य इंजन है। साथ ही बड़ी संख्या में रोजगार भी निजी क्षेत्र में मिलते हैं।

देश के निजी क्षेत्र से आत्मविश्वास के साथ आगे बढे

पने भाषण में शी जिनपिंग ने देश के निजी क्षेत्र से आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने पर जोर दिया क्योंकि चीन में निजी क्षेत्र ही विकास का मुख्य इंजन है। साथ ही बड़ी संख्या में रोजगार भी निजी क्षेत्र में मिलते हैं। साथ ही उन्होंने देश के कारोबारी जगत से भी जिम्मेदारी, ईमानदारी और सहानुभूति के साथ काम करने की अपील की और कहा कि वह चाहते हैं कि सभी लोग समृद्ध हो। बता दें कि चीन पर आरोप लगते रहते हैं कि वहां उच्च वर्ग के लोगों को ही देश के आर्थिक विकास का फायदा मिलता है। शी जिनपिंग ने आगाह किया कि आने वाले दिनों में उनकी चुनौतियां और खतरे और ज्यादा बढ़ सकते हैं।

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