कांग्रेस महाधिवेशन में कमलनाथ ने पेश किया आर्थिक प्रस्ताव, कहा “दिल और हृदय की बात है रोजगार”

रायपुर : महाधिवेशन के दूसरे दिन कांग्रेस के कई नेताओं ने संबोधित किया। कमलनाथ आर्थिक प्रस्ताव पेश किए वही राज्यसभा सांसद रंजीत रंजन ने स्वतंत्र एजेंसियों को खतरे में बताया।पीसीसी चीफ कमलनाथ महाधिवेशन में आर्थिक प्रस्ताव पेश किए। उन्होंने 50 साल पहले 1972 में कोलकाता के महाधिवेशन का जिक्र किया।

मध्यप्रदेश के पीसीसी अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा कि आर्थिक प्रस्ताव के दिल और हृदय की बात है रोजगार। आज तीन चुनौतिया हैं, देश के सामने। बेरोजगारी, संस्कृति की रक्षा। संविधान की रक्षा। आज के नौजवान और पहले के नौजवान में अंतर है। आज बेरोजगारी सबसे बड़ी चुनौती है। पढ़े लिखे बेरोजगार हैं। 8वीं पास बेरोजगार, 9वीं पास बेरोजगार हैं। इनकी पीड़ा हमें समझनी है। इनके लिए काम करना है। हम बात कर सकते हैं तरह-तरह के आंकड़ों की। मगर मैं उस ओर नहीं जाऊंगा। बेरोजगारी की समस्या का समाधान कांग्रेस कर सकती है। हमारी संस्कृति देश को जोड़ने की है। हम दिल को जोड़ते हैं। कांग्रेस लोगों को जोड़ती है।

आज जरूरत है देश के स्तंभों को बचाने की : सांसद रंजीत रंजन

राज्यसभा सांसद रंजीत रंजन ने कहा कि मुझे गर्व है महाधिवेशन में बोलने को मौका मिला। आज कोई और बोल रहा था। कल कोई और बोलेगा।आज जरूरत है देश के स्तंभों को बचाने की। स्वतंत्र एजेंसी को बचाने की। चाहे वो सदन हो, हमारी पार्टी हो, ईडी हो। आज इन सब तंत्र की हत्या केंद्र सरकार में बैठे लोग कर रहे हैं। ऐसा पहले नहीं हुआ।

हमें सदन में चुप कराया जाता है। हम कुछ कहते हैं तो ईडी से बुलाकर हमारे नेताओं को परेशान किया जाता है। आज जरूरत है हमें सिर्फ कांग्रेस पार्टी के लिए नहीं। बल्कि इस देश को बचाने के लिए। संकल्प लेने के लिए आए हैं, हम भारत जोड़ने की जिम्मेदारी लेते हैं। इन एजंसियों को बचाने की जिम्मेदारी लेते हैं।

भारत जोड़ो यात्रा हमने नफरत, बेरोजगारी खत्म करने के लिए की

देश के लोग डरे हुए हैं। विरोध करने पर केस दर्ज कर दिया जाता है। छत्तीसगढ़ में भी महाधिवेशन के पहले डराया गया है। डराते वो लोग हैं जो खुद डरते हैं। हमें अपने मुद्दे को गांव-गांव तक पहुंचाना है। भारत जोड़ो यात्रा हमने नफरत, बेरोजगारी खत्म करने के लिए की है, जो राजनीतिक संकल्प हमने लिया है। उसे पूरा करें। हमारा जो फर्ज है उसे पूरा करें। हम सब बेखौफ होकर अपने मुद्दों को लोगों को सामने रखें। अंतिम में कहूंगी छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया।

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