सुप्रीमकोर्ट : चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को हर एक चल संपत्ति का खुलासा करने की जरुरत नहीं

नई दिल्ली : देश में लोकसभा चुनाव की गूंज है। उम्मीदवार नामांकन करवा रहे हैं। 19 अप्रैल को पहले फेज की वोटिंग होगी। नामांकन के दौरान उम्मीदवार चल और अचल संपत्ति, अपराध आदि का विवरण भी दाखिल करते हैं। इसे हलफानामा भी कहा जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को उनके या आश्रितों के स्वामित्व वाली हर एक चल संपत्ति का खुलासा करने की जरूरत नहीं है, जब तक कि वे पर्याप्त मूल्य की न हों या लग्जरी लाइफ स्टाइल को न प्रदर्शित करती हो।

सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश 2019 के अरुणाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में तेजू सीट से निर्दलीय विधायक कारिखो क्रि के चुनाव को बरकरार रखते हुए आया है। जस्टिस अनिरुद्ध बोस और संजय कुमार की पीठ ने गुवाहाटी हाईकोर्ट के उस फैसले को भी रद्द कर दिया, जिसमें कारिखो के चुनाव को अमान्य कर दिया गया था।

मतदाता को हर संपत्ति जानने का अधिकार नहीं

शीर्ष अदालत ने कहा कि एक मतदाता को किसी उम्मीदवार की प्रत्येक संपत्ति के बारे में जानने का पूर्ण अधिकार नहीं है। उम्मीदवार को अपनी उम्मीदवारी से अप्रासंगिक मामलों के संबंध में गोपनीयता का अधिकार है। अदालत ने कहा कि कारिखो क्रि ने नामांकन दाखिल करने से पहले गाड़ियों को या तो गिफ्ट कर दी थी या बेच दी थी। इसलिए गाड़ियों पर उनके परिवार का मालिकाना हक नहीं था।

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता के इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि क्रि को अपनी संपत्ति के सभी विवरणों का खुलासा करना चाहिए था, क्योंकि मतदाताओं का जानने का अधिकार पूर्ण है। हालांकि अदालत ने यह भी कहा कि अगर किसी उम्मीदवार की उम्मीदवारी पर प्रभाव पड़ता है तो उन्हें संपत्ति का खुलासा करना होगा।

अदालत ने कहा कि कोई उम्मीदवार चल संपत्ति की हर एक चीज जैसे कपड़े, जूते, क्रॉकरी, स्टेशनरी, फर्नीचर की घोषणा करे यह आवश्यक नहीं है। लेकिन कोई मूल्यवान चीज है जो एक संपत्ति बनती है तो उसका खुलासा करने की आवश्यकता है।

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