CG : नक्सलियों के रेस्ट रूम को एसटीऍफ़ जवानों ने बनाया अपना वाररूम, यहां नक्‍सली करते थे मीटिंग

सुकमा : छत्‍तीसगढ़ के नक्‍सल प्रभावित बीजापुर व सुकमा की सीमा से लगा पूर्वती गांव जहां पिछले कई दशकों से नक्सलियों का कब्जा रहा है। यहां नक्सलियों की जनताना सरकार का संचालन होता था। गांव में नक्सलियों के खेत हैं, जिसमें सब्जी से लेकर नारियल लगाया हुआ है। गांव के बीच में रेस्ट रूम बनाया गया है जो अब एसटीएफ का वार रूम बन गया है। स्कूल से लेकर गांव में मुरुम सड़क का निर्माण नक्सलियों ने कराया है। ये इलाका नक्सलवाद के लिए सुरक्षित था लेकिन यहां कैंप खुलने से जवानों का कब्जा हो गया है।

जिला मुख्यालय से करीब 120 किमी दूर स्थित पूर्वती गांव जो घोर नक्सल प्रभावित है। यहां 25 लाख का इनामी नक्सली हिड़मा, बारसे देवा का पैतृक गांव है। पुलिस की माने तो इस गांव से करीब 70 नक्सली संगठन में काम कर रहे है। यहां गांव में सात अलग-अलग पारे है और उसमें करीब एक हजार लोग निवासरत है।

गांव को नक्सलियों ने अपने सुविधा के रूप में विकसित किया था। गांव से 100 मीटर दूर 4 एकड़ का एक खेत जो काफी हरा-भरा था। उसमें विभिन्न प्रकार की सब्जी लगी हुई थी। नारियल के पेड़ व चारों और से तारबंदी की हुई है वहां बताया गया कि ये खेती नक्सल संगठन की और से की गई है। जिसकी सब्जी व फलों का सेवन सिर्फ नक्सली करते हैं।

वहीं थोड़ी दूर पर एक तालाब दिखा और बहुत बड़ा था। वहां आसपास नक्सलियों द्वारा मोर्चा बनाया गया है। और तालाब में मछली पालन का काम किया जाता था। गांव के भीतर मुरुम सड़क का निर्माण कराया गया था। पूरे गांव को नक्सलियों ने अपने जरूरत के हिसाब से बना रखा था। लेकिन अब वहां सुरक्षा बल के जवानों का कब्जा हो गया।

रेस्ट रूम बना वार रूम

गाँव के बंडीपारा जहां नक्सलियों द्वारा रेस्ट रूम बनाया गया था। पुलिस की माने तो वहां नक्सल संगठन के नेता रुकते थे और बैठकें लेते थे। अब वहां पर एसटीएफ के जवानों ने वॉर रूम बना दिया। बांस की लकड़ी व गोबर से बना ये कमरा जिसमें बैटरी रखी हुई थी। वहां भीतर खाने बनाने का समान व चूल्हा बनाया हुआ था। चारों तरफ बांस की लकड़ी व भीतर हरी चटाई लगाई हुई थी जिसमें गर्मी के दिनों में हवा आ सके। वहीं रेस्ट रूम में लगे दरवाजे के पीछे वर्णमाला लिखा हुआ था, मतलब वहां बच्‍चों को पढ़ाने का भी काम किया जाता रहा होगा।

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