सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बॉन्ड स्कीम रद्द किया, कहा- चंदे की जानकारी न देना असंवैधानिक, वोटर्स को जानने का हक

नईदिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुमनाम चुनावी बॉन्ड स्कीम पर बड़ा फैसला देते हुए इस पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि चंदे की जानकारी न देना असंवैधानिक है। इसके साथ ही यह सूचना के अधिकार का उल्लंघन भी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वोटर्स को यह जानने का हक है कि पार्टियों को किसने चंदा दिया है। केंद्र सरकार की चुनावी बॉन्ड योजना की कानूनी वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ का कहना है कि दो अलग-अलग फैसले हैं। एक उनके द्वारा लिखा गया और दूसरा न्यायमूर्ति संजीव खन्ना द्वारा और दोनों फैसले सर्वसम्मत हैं।

चंदा देने वालों के नाम का खुलासा होना चाहिए
सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि चुनावी बांड के माध्यम से कॉर्पोरेट योगदानकर्ताओं के बारे में जानकारी का खुलासा किया जाना चाहिए क्योंकि कंपनियों द्वारा दान पूरी तरह से बदले के उद्देश्य से है। सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि गुमनाम चुनावी बांड योजना अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत सूचना के अधिकार का उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि राजनीतिक दल चुनावी प्रक्रिया में प्रासंगिक इकाइयां हैं और चुनावी विकल्पों के लिए राजनीतिक दलों की फंडिंग के बारे में जानकारी आवश्यक है।

चंदा देने वालों के नाम का खुलासा होना चाहिए
सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि चुनावी बॉन्ड के माध्यम से कॉर्पोरेट योगदानकर्ताओं के बारे में जानकारी का खुलासा किया जाना चाहिए क्योंकि कंपनियों द्वारा दान पूरी तरह से बदले के उद्देश्य से है। सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि गुमनाम चुनावी बॉन्ड योजना अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत सूचना के अधिकार का उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि राजनीतिक दल चुनावी प्रक्रिया में प्रासंगिक इकाइयां हैं और चुनावी विकल्पों के लिए राजनीतिक दलों की फंडिंग के बारे में जानकारी आवश्यक है।

पार्टियां बताएं उन्हें कितना पैसा मिला
सुप्रीम कोर्ट ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) को आदेश दिया है कि बैंक अदालत को इलेक्ट्रोरल बांड के बारे में जानकारी दे। एसबीआई चुनावी बांड जारी करना तुरंत रोके। कोर्ट ने कहा कि राजनीतिक दल बताएं कि चुनावी बांड से उन्हें कितना पैसा मिला।

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