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आज दुर्लभ गुरु पुष्य योग समेत सात अद्भुत संयोग

ख़ास ख़बर January 25, 2024 रिपोर्टर: shailesh
आज दुर्लभ गुरु पुष्य योग समेत सात अद्भुत संयोग

आज दुर्लभ गुरु पुष्य योग समेत सात अद्भुत संयोग

हमारे देश में गुरुवार व पुष्य नक्षत्र के सन्योग का बड़ा महत्व है। शास्त्रों के अनुसार, गुरु पुष्य योग निवेश, व्यापारिक लेन-देन, सोना-चांदी खरीदने और धन प्राप्ति के लिए अत्यंत शुभ है। साल 2024 का पहला पुष्य नक्षत्र आज 25 जनवरी को पड़ रहा है। यह बेहद खास माना जा रहा है।इस दिन दुर्लभ ‘गुरु पुष्य योग’ समेत सात अद्भुत संयोग बन रहे हैं। मान्यतानुसार इन योग में भगवान विष्णु की पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन खरीदारी करने से घर में संपन्नता आती है। गुरु पुष्य योग पर स्वर्ण-रजत आभूषणों , वाहनों व सम्पत्ति की खरीदारी भी जमकर होगी। इसके चलते बाजार में भी बूम रहेगी।

दिन भर रहेगा पुष्य नक्षत्र

हिंदू पंचांग के अनुसार, गुरु पुष्य योग 25 जनवरी 2024 दिन गुरुवार को सुबह 8:16 बजे से आरंभ होगा। साथ ही इसका समापन 26 जनवरी सुबह 10:28 बजे पर होगा। इस दौरान आप खरीदारी समेत अन्य शुभ कार्य कर सकते हैं।

ग्रहों की स्थिति अनुकूल

ज्योतिष शास्त्रियों के अनुसार 27 नक्षत्र बताए गए हैं। पुष्य नक्षत्र हर पुनर्वसु नक्षत्र के बाद आता है। पुष्य नक्षत्र गुरुवार को पड़े तो गुरु पुष्य योग बनता है, रविवार को पड़े तो रवि पुष्य योग बनता है। 25 जनवरी को को गुरु पुष्य, अमृत योग , सर्वार्थ सिद्धि योग सहित सात शुभयोगों का भी संयोग बन रहा है।इस तरह से ग्रहों की स्थिति परिस्थिति बहुत ही बढ़िया है। यह हर पूजन अनुष्ठान व हर तरह के शुभ कार्य के लिए बहुत अच्छा दिन है। गुरु पुष्य अमृत योग और रवि पुष्य अमृत योग को केवल खरीदारी से जोड़कर नहीं देख सकते। इस दिन कोई भी अनुष्ठान, शुभ कार्य इस दिन करने से उनकी शुभता बढ़ती है।

ये महत्वपूर्ण योग बन रहे

ज्योतिषाचार्य जनार्दन शुक्ला के अनुसार पौष पूर्णिमा पर सबसे पहले प्रीति योग का निर्माण हो रहा है। इस योग का निर्माण सुबह 07 बजकर 32 मिनट से हो रहा है और अगले दिन यानी 26 जनवरी को 7 बजकर 42 मिनट पर समाप्त होगा। वहीं, सर्वार्थ सिद्धि योग दिन भर है। जबकि, रवि योग सुबह 07 बजकर 13 मिनट से लेकर 8 बजकर 16 मिनट तक है। पूर्णिमा पर दुर्लभ गुरु पुष्य योग का निर्माण सुबह 08 बजकर 16 मिनट से होगा, जो अगले दिन 26 जनवरी को सुबह 07 बजकर 12 मिनट पर समाप्त होगा। इसी समय पर अमृत सिद्धि योग का भी निर्माण होगा, जो अगले दिन 26 जनवरी को सुबह सात बजकर 12 मिनट तक है। इसके अलावा, पौष पूर्णिमा पर बव करण योग का निर्माण 11 बजकर 23 मिनट तक हो रहा है। इसके बाद बालव करण का योग बनेगा।

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