टेस्ला की फैक्ट्री में रोबोट का इंसान पर हमला, हर तरफ बिखरा खून ही खून, सवालों के घेरे में अरबपति एलन मस्क

वॉशिंगटन: अमेरिका के टेक्सास में एलोन मस्क की कार कंपनी टेस्ला की फैक्ट्री है। इस फैक्ट्री में खराबी के बाद एक इंजीनियर पर रोबोट ने हमला कर दिया। अपने साथी कर्मचारी के साथ ऐसा होते देख दो लोग भयभीत हो गए। जिस मशीन ने हमला किया है उसे ताजा एल्युमीनियम कार के हिस्सों को पकड़ने के लिए डिजाइन किया गया था। रोबोट ने एक आदमी को तब पकड़ लिया जब वह पास के ही दो अन्य रोबोट के लिए सॉफ्टवेयर प्रोग्रामिंग कर रहा था। डेलीमेल की रिपोर्ट के मुताबिक रोबोट के धातु वाले पंजे टेस्ला कर्मचारी की पीठ और बांह में घुस गए। कारखाने की फर्श पर खून का निशान फैल गया। दूसरे कर्मचारियों ने इमरजेंसी बटन दबाकर रोबोट को रोका।

हमले में पीड़ित के बाएं हाथ पर घाव हो गया। घटना का खुलासा ट्रैविस काउंटी और संघीय रेगुलेटरों को दायर की गई 2021 की रिपोर्ट में हुआ है। जबकि 2021 या 2022 में टेक्सास कारखाने में टेस्ला की ओर से नियामकों को किसी अन्य रोबोट से जुड़ी चोट के बारे में सूचना नहीं दी गई थी। इस घटना के बारे में जानकारी ऐसे समय में आई है, जब हाल के दिनों ने रोबोट से होने वाले जोखिम बढ़े हैं। कई कंपनियों में रोबोट से होने वाली चोट और शतरंज खिलाड़ी की उंगली तोड़ने वाले रोबोट के मामले इसी साल आए हैं।

फैक्ट्री में लग रही चोट

टेक्सास की फैक्ट्री में श्रमिकों का प्रतिनिधित्व करने वाली एक वकील ने एक बड़ा आरोप लगाया है। उनका दावा है कि श्रमिकों के साथ बातचीत में पता चला कि कारखाने में हुई चोटों की संख्या कम बताई जा रही है। वकील ने कहा कि इस कम रिपोर्टिंग में 28 सितंबर 2021 में एक निर्माण श्रमिक की मौत भी शामिल है। वकील हन्ना अलेक्जेंडर ने कहा, ‘मेरी सलाह है कि रिपोर्ट बेहद ध्यान से पढ़ा जाए।’ ट्रैविस काउंटी मेडिकल परीक्षण की एक रिपोर्ट के मुताबिक मरने वाले निर्माण श्रमिक का नाम एंटेल्मो रामिरेज है, जिसकी मौत हीट स्ट्रोक से हुई थी।

ये भी लगे आरोप

पिछले साल वर्कर्स डिफेंस प्रोजेक्ट ने गीगा टेक्सास के श्रमिकों की ओर से यूएस ऑक्यूपेशनल सेफ्टी एंड हेल्थ एडमिनिस्ट्रेशन (OSHA) में शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि टेस्ला के ठेकेदारों और उपठेकेदारों ने कुछ कर्मचारियों को झूठे सुरक्षा प्रमाणपत्र दिए हैं। अलेक्जेंडर ने कहा, ‘श्रमिकों ने बताया कि जब भी उन्हें प्रशिक्षण की जरूरत होती थी तो उन्हें पीडीएफ या तस्वीरें भेज दी जाती थीं। ऐसा कोई तरीका नहीं था कि वर्कर प्रशिक्षण ले सके।’

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