सीबीआई जांच की सहमति वापस लेने के मामले में बोलने से डीके शिवकुमार ने किया किनारा; जानें पूरा मामला

बंगलूरू : कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कई मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए बताया था कि पिछली भाजपा सरकार ने उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति रखने के मामले में सीबीआई को जांच की मंजूरी दी थी, जो कि कानून के तहत नहीं था। अब उन्होंने इस मामले में बोलने से इनकार कर दिया है। इस मामले में कांग्रेस अब सीबीआई को दी गई सहमति को वापस लेने का आदेश जारी कर सकती है।

डीके शिवकुमार ने खुद को गुरुवार को मुख्यमंत्री के नेतृत्व में होने वाली कैबिनेट बैठक से दूर रखा। उन्होंने कहा, ‘मैंने पेपर में देखा, मैं उपस्थित नहीं हो सका। जिन्हें भी इस मामले में कुछ कहना है वह कहे।’वह चुनावी अभियान के लिए दो दिनों के लिए तेलंगाना जा रहे थे। उन्होंने कहा, ‘अगर पार्टी मुझे अभियान को आगे बढ़ाने के लिए कहेगी तो मैं वही करूंगा। कर्नाटक हाईकोर्ट ने बुधवार को आय से अधिक संपत्ति मामले में मुकदमा चलाने के लिए सीबीआई को दी गई मंजूरी के खिलाफ शिवकुमार की अपील पर सुनवाई 29 नवंबर तक के लिए स्थगित कर दी है।’

इससे पहले, एकल न्यायाधीश पीठ ने शिवकुमार की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने उन पर मुकदमा चलाने के लिए सरकार द्वारा 25 सितंबर, 2019 को दी गई मंजूरी को चुनौती दी थी।  इसके बाद शिवकुमार ने खंडपीठ के समक्ष याचिका दायर की। खंडपीठ ने एकल न्यायाधीश के आदेश पर रोक लगा दी थी। इस रोक को हटाने के लिए सीबीआई ने अर्जी दाखिल की थी।

क्या है पूरा मामला

आयकर विभाग ने 2017 में शिवकुमार के आवास और कार्यालयों की तलाशी ली थी, जिसके बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उनके खिलाफ जांच शुरू की। ईडी की जांच के आधार पर सीबीआई ने शिवकुमार के खिलाफ मामला दर्ज करने के लिए कर्नाटक सरकार से मंजूरी मांगी थी। राज्य सरकार ने 25 सितंबर, 2019 को मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी थी। सीबीआई ने तीन अक्तूबर 2020 को एफआईआर दर्ज की थी। सीबीआई ने दावा किया कि सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली पहली कांग्रेस सरकार में ऊर्जा मंत्री के तौर पर शिवकुमार ने 01 अप्रैल, 2013 से 30 अप्रैल, 2018 तक आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक 74.93 करोड़ रुपये की संपत्ति अर्जित की।

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