रूस के साथ जंग के बीच यूक्रेनी राष्‍ट्रपति जेलेंस्‍की का बड़ा ऐलान, अमेरिका से एफ-16 दिलाने वाले रक्षा मंत्री की छुट्टी

कीव: यूक्रेन के राष्‍ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्‍की ने अपने रक्षा मत्री ओलेस्‍की रेजनिकोव को हटाने का मन बना लिया है। जेलेंस्की ने रेजनिकोव को हटाने की अपनी मंशा की घोषणा कर दी है। इससे यूक्रेन की रक्षा व्यवस्था में रूस के फरवरी 2022 में पूर्ण पैमाने पर आक्रमण के बाद से सबसे बड़ा बदलाव कहा जा रहा है। रात को एक वीडियो जारी कर जेलेंस्‍की ने कहा कि ओलेक्सी रेजनिकोव को बर्खास्त करेंगे। इस हफ्ते संसद से अपील करेंगे कि उनकी जगह पर रूस्तम उमरोव को नया रक्षा मंत्री नियुक्‍त किया जाए। उमरोव मुख्य निजीकरण कोष के मुखिया हैं।

नवंबर 2021 से रक्षा मंत्री

रेजनिकोव, नवंबर 2021 से रक्षा मंत्री हैं। उन्‍होंने युद्ध दौरान अरबों डॉलर की पश्चिमी सैन्य सहायता हासिल करने में मदद की है। लेकिन उनके मंत्रालय के आसपास भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे हुए हैं, जिन्हें उन्होंने धब्बा बताया है। जेलेंस्‍की का फैसला भ्रष्टाचार पर नियंत्रण लगाने वाला माना जा रहा है जिस पर यूक्रेनी राष्‍ट्रपति ने काफी जोर दिया है। यूक्रेन ने यूरोपियन यूनियन में शामिल होने के लिए आवेदन किया है। युद्ध जारी है और इसका कोई अंत नहीं दिख रहा है। माना जा रहा है कि ऐसे में देश की जनता भ्रष्टाचार के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हो गई है।

क्‍या बोले जेलेंस्‍की

जेलेंस्‍की ने कहा, ‘ मैंने यूक्रेन के रक्षा मंत्री को बदलने का फैसला किया है। ओलेक्सी रेजनिकोव 550 से अधिक दिनों के पूर्ण पैमाने पर युद्ध से गुजरे हैं। मुझे विश्वास है कि मंत्रालय को सेना और समाज के साथ पूरी तरह से बातचीत के लिए नए दृष्टिकोण और अन्य प्रारूपों की आवश्यकता है।’ जेलेंस्की ने उम्मीद जताई है कि संसद उमरोव की नियुक्ति को मंजूरी देगी। उन्‍होंने उमरोव को किसी अतिरिक्त परिचय की आवश्यकता नहीं है। जेलेंस्की को उमरोव के उम्मीदवार को समीक्षा के लिए संसद में प्रस्तुत करना होगा।

कौन हैं नए रक्षा मंत्री

एक 41 वर्षीय पूर्व सांसद और क्रीमियन तातार, उमरोव ने सितंबर 2022 से यूक्रेन की राज्य संपत्ति कोष का नेतृत्व किया है। साथ ही युद्ध के बीच ही काला सागर अनाज सौदे पर संवेदनशील युद्धकालीन वार्ता में एक बड़ी भूमिका निभाई है। उन्हें संपत्ति कोष में उनके रिकॉर्ड के लिए यूक्रेन में काफी तारीफ मिली है। यह विभाग देश की संपत्ति के निजीकरण की देखरेख करता है। कहा जाता है कि उनके कार्यभार संभालने से पहले भ्रष्टाचार के घोटालों में उलझा हुआ था।

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