अरबपति हीरा कारोबारी ने एमबीए पास पोते से करवाई मजदूरी…कभी बना वेटर तो कभी सेल्समैन

सूरत : सूरत के डायमंड कारोबारी सावजी भाई ढोलकिया  को भला कौन नहीं जानता। दीपावली बोनस में अपनी फैक्ट्री में काम करने वाले कर्मचारियों को कारें, मकान और ज्वैलरी गिफ्ट करने वाले सावजी भाई ढोलकिया किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। सावजी भाई ढोलकिया ने कड़ी मेहनत से अपना कारोबार खड़ा किया है और वह जानते हैं कि लोग किस हाल में काम करते हैं, इसलिए वह अपने कर्मचारियों को हमेशा खुश रखते हैं। सावजी भाई ढोलकिया एक बार फिर सुर्खियों में हैं लेकिन बार में वे अपने कर्मचारियों को कोई गिफ्ट देने के लिए चर्चा में नहीं हैं, बल्कि अपने पोते को मजदूरी पर भेजने को लेकर चर्चा में हैं।

रुविन ढोलकिया ने चेन्नई में की मजदूरी

सावजी भाई ने अमेरिका से मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (MBA) की पढ़ाई पूरी करके लौटे अपने पोते रुविन ढोलकिया ( Ruvin Dholakia)को चेन्नई में एक गुमनाम शख्स के पास मजदूरी करने के लिए भेजा है। दरअसल सावजी भाई चाहते हैं कि उनका पोता बिजनेस स्कूल में सिखाई गई शिक्षा परे असल जिंदगी की मैनेजमेंट को समझे कि जो पढ़ाया जाता है वो जमीनी हकीकत से काफी अलग होता है। वहीं अपने दादा के आदेश पर रुविन ढोलकिया बिना देर किए चेन्नई रवाना हो गए। बताया जा रहा है कि रुविन 30 जून से चेन्नई में किसी दुकान में मजदूरी का काम कर रहे थे। उन्हें सख्त आदेश था कि वह न तो अपनी असल पहचान उजागर करेंगे और न ही मोबाइल फोन का इस्तेमाल करेंगे। चेन्नई जाने के लिए रुविन को सिर्फ 6 हजार रुपए दिए गए थे।

चेन्नई पहुंचने के बाद रुविन का पहला काम नौकरी की ढूंढना था। रुविन को खुद ही नौकरी ढूंढनी थी और सबकुछ मैनेज करना था। रुविन जब काम ढूंढने गए तो उन्हें कई जगहों पर रिजेक्शन का सामना करना पड़ा। आखिरकार रुविन को एक सेल्समैन के तौर पर नौकरी मिली, वह एक गारमेंट शॉप में लगे। रुविन ने इस गारमेंट शॉप पर सेल्समैन के गुर सीखे। इसके बाद रुविन ने 8 दिनों तक एक होटल में वेटर के रूप में काम किया। यहां उसने प्लेटिंग सेंटिंग से लेकर खाना परोसने के हुनर पर काम किया। भोजनालय में काम करने के बाद  9 दिनों तक वॉच आउटलेट में सेल्समैन के रूप में काम किया और घड़ी की मरम्मत करनने वाले के सहायक के रूप में काम किया। इसके बाद वह एक अन्य दुकान पर लगे जहां उन्होंने मजदूरी की। 30 दिन के अंदर रुविन ने अलग-अलग कई दुकानों पर काम किया।

दिन में सिर्फ एक बार खाया खाना

रुविन ने अपनी इस 30 दिवसीय एक्सपीरियंस के बारे बताते हुए कहा कि उनको 6 हजार रुपए मिले थे और प्रतिदिन सिर्फ 200 रुपए खर्च करने की परमिशन दी गई थी। चेन्नई में वह एक मामूली छात्रावास में रहे और दिन में सिर्फ एक समय का भोजन ही कर पाते थे। रुविन ने बताया कि इतनी पढ़ाई करने बाद भी जब वह कहीं नौकरी मागने जाते तो जब रिजेक्ट होते थे तो न का दर्द क्या होता है वो समझ में आया। रुविन ने बताया कि जब होटल में वेटर का काम करते हुए 27 रुपए टिप मिली तो वो फिलींग अलग थी, लगा करोड़ों रुपए मिल गए।

रुविन ने बताया कि जब उन्होंने होटल की नौकरी छोड़ी तो अपनी ही सैलरी लेने के लिए 6 घंटे तक का इंतजार करना पड़ा और होटल मालिक ने बड़े अजीब तरीके से 2000 हजार रुपए सामने फेंक दिए, तब समझ में आया कि मेहनत करने वाले के साथ किस तरह का व्यवहार करना चाहिए। बैग की दुकान में मजदूरी करते समय 10-11 घंटे जमीन पर बैठकर काम किया तो समझ आया कि मजदूरी करना और सारा दिन बैठना क्या होता है।

वहीं रुविन ने कहा कि वह भगवान का आभार जताते हैं कि उनको  ऐसे परिवार में जन्म दिया है जहां उनकी अच्छी शिक्षा और परवरिश हुई है। रुविन ने बताया कि इन 30 दिनों में उन्होंने 8,600 रुपए अपनी मेहनत से कमाए। वहीं जब रुविन लौट कर घर आए तो परिजनों ने उनका जोरदार स्वागत किया।

बता दें कि सावजीभाई ढोलकिया को दिलदार बॉस के नाम से भी लोग पहचानते हैं। अपने कर्मचारियों के लिए उनका व्यवहार विनम्रता और परोपकारिता भरा है। सावजीभाई ढोलकिया ने सौराष्ट्र के अपने लाठी गांव में 125 झीलें बनाकर ‘लेक मैन ऑफ इंडिया’ का खिताब भी हासिल किया है, इससे आसपास के 75 से अधिक गांवों के 2 लाख से अधिक किसानों को लाभ हुआ है। सावजीभाई ने भारत में विभिन्न स्थानों पर 25 लाख से अधिक पेड़ लगवाए हैं।

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