पूरी होगी चीन की मुराद! भारत की मंजूरी के बाद ब्रिक्‍स में नए सदस्‍यों को मिल सकती है एंट्री

जोहानसबर्ग: दक्षिण अफ्रीका के जोहानसबर्ग में 22 अगस्‍त से 24 अगस्‍त तक ब्रिक्‍स सम्‍मेलन का आयोजन होना है। सूत्रों की मानें तो अगले महीने होने वाले शिखर सम्मेलन में चर्चा के लिए प्रस्ताव आने पर भारत पांच देशों वाले ब्रिक्स के विस्तार पर अपना रुख नरम कर सकता है। बताया जा रहा है कि वह कुछ शर्तों पर नरम रुख अपनाने को तैयार है। कुछ दिनों पहले ऐसी खबरें आई थीं कि चीन इस संगठन में अर्जेंटीना, मिस्र, इंडोनेशिया, यूएई, सऊदी अरब, अल्‍जीरिया, बांग्‍लादेश और ईरान जैसे 40 देशों को जगह देना चाहता है। मगर भारत के अलावा ब्राजील को इससे विस्‍तार पर आपत्ति है।

3-5 सदस्‍यों पर रजामंदी!

कुछ दिनों पहले इस संगठन के विस्‍तार पर चर्चा के लिए एक मीटिंग हुई थी। इसमें इसका विस्‍तार एजेंडे का मुख्‍य बिंदु था। जो जानकारी आ रही है उसके मुताबिक भारत इस बात पर जोर नहीं देगा कि न्यूनतम जीडीपी और ब्लॉक सदस्यों के साथ व्यापार जैसे योग्यता के मानकों पर खरा उतरा जाएा। साथ ही घोषित मानदंडों को मौजूदा सदस्यों द्वारा समर्थित देशों को शामिल करने के लिए ‘सख्ती’ से पूरा करने वाली अपनी शर्त भी भारत छोड़ सकता है। एक अधिकारी के हवाले से बिजनेस लाइन ने बताया है कि भारत की तरफ से ब्रिक्स में करीब तीन से पांच नए सदस्यों को शामिल करने का समर्थन करने की संभावना है।

शर्तों में देगा ढील

भारत इस बात पर जोर नहीं देगा कि उसके द्वारा बढ़ाए गए योग्यता के मानदंड, जैसे कि 400 अरब डॉलर की जीडीपी और 50 अरब डॉलर का ब्रिक्स व्यापार, को सख्ती से पूरा किया जाएगा। चीन ने पिछले साल कहा था कि उसकी मंशा नए सदस्यों को शामिल करने की है। मगर भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पिछले महीने कहा था कि इस प्रक्रिया पर अभी भी कार्य जारी है। उन्‍होंने कहा था कि मानदंडों और प्रक्रियाओं पर विचार-विमर्श की जरूरत है। ब्राजील की फंडाकाओ गेटुलियो वर्गास यूनिवर्सिटी में में एसोसिएट प्रोफेसर ओलिवर स्टुएनकेल ने कहा कि भारत की चिंता यह है कि इसका विस्‍तार किस हद तक होगा।

क्‍या है ब्रिक्‍स

ब्राजील, रूस, भारत और चीन ने साल 2009 में ब्रिक्स का गठन किया, और दक्षिण अफ्रीका अगले वर्ष इसमें शामिल हुआ- अब तक शामिल होने वाला एकमात्र अतिरिक्त सदस्य। राजदूत अनिल सूकलाल ने कहा कि दक्षिण अफ्रीका ने 2018 में और विस्तार का प्रस्ताव रखा और पिछले साल गंभीरता से चर्चा शुरू हुई। उनका कहना था कि अभी यह देखना होगा कि क्या उस दिशा में कोई महत्वपूर्ण कदम उठाया जाएगा या नहीं। चीन विस्तारित ब्रिक्स का सबसे मजबूत समर्थक है और उसके बाद रूस का नंबर है। इस बीच भारत और ब्राजील दोनों को ही चिंता है कि अगर इसका विस्‍तार हुआ तो वो एक बड़े समूह पर अपना प्रभाव खो देंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

This will close in 20 seconds