क्या है बीजेपी की नीति? : मुख्तार अंसारी के बेटे की NDA में एंट्री!, राजभर की सुभासपा से विधायक है अब्बास, फिलहाल वो जेल में

नईदिल्ली। लोकसभा चुनावों के मद्देनजर भारतीय जनता पार्टी एक-एक सीट पर समीकरणों को साधने की कवायद में उन तमाम दलों को एक बार फिर से अपने साथ ला रही है, जो NDA का हिस्सा रहे हैं. इसी क्रम में उत्तर प्रदेश से सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) की भी एक बार फिर से NDA में एंट्री हो गई है. सुभासपा के बीजेपी के साथ जाने को लेकर दो यक्ष प्रश्न उठ रहे हैं.

पहला है कि राजभर गठबंधन में शामिल होने के लिए तीन सीटों की मांग कर रहे थे, क्या बीजेपी की तरफ से उन्हें इन सीटों पर लड़ने का आश्वासन मिला? वहीं दूसरा सवाल है कि सुभासपा अब NDA के साथ हो गई है तो क्या उनकी पार्टी के विधायक और मुख्तार अंसारी के बेटे अब्दुल्ला अंसारी को भी NDA ने स्वीकार कर लिया है?

अंसारी परिवार का सवाल इसलिए भी जरूरी हो जाता है, क्योंकि सुभासपा के टिकट पर मऊ से मुख्तार अंसारी के बेटे अब्दुल्ला अंसारी विधायक हैं. फिलहाल वो जेल में हैं, लेकिन पार्टी से अलग नहीं हुए हैं. वहीं NDA घटक की सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी की नीतियां मुख्तार अंसारी के परिवार के राजनीतिक रसूख को खत्म करने की दिखाई देते हैं. ऐसे में ये सवाल लाजमी हो जाता है कि क्या सुभासपा के साथ बीजेपी ने अब्दुल्ला अंसारी को भी कबूल लिया है?

अंसारी परिवार बिन पूर्वांचल में सुभासपा का क्या होगा?
अगर इस सवाल का जवाब न होता है तो अगला सवाल यक्ष बन कर खड़ा हो जाता है कि अंसारी परिवार के बिना सुभासपा पूर्वांचल में कैसे चुनाव जीतने का दंभ भर रही है. पूर्वांचल के मऊ, बलिया, चंदौली और गाजीपुर इलाके में अंसारी परिवार का रसूख माना जाता है. यहां ऐसी सीटें हैं, जहां से इस परिवार के लोग कभी चुनाव नहीं हारे हैं. विधानसभा हो या लोकसभा हर चुनाव में पूर्वांचल की इन सीटों पर बिना अंसारी परिवार के समर्थन से लड़ना नामुमकिन सा दिखाई देता है.

मऊ से अब्बास अंसारी विधायक हैं तो गाजीपुर लोकसभा सीट पर पिछले चुनावों में मुख्तार अंसारी के भाई अफजाल अंसारी सांसद चुने गए थे. हालांकि चार साल की सजा मिलने के बाद उनकी ये सीट छिन गई. लेकिन परिवार का दबदबा और राजनीतिक रसूख अभी बरकरार है.

सीटों के किस फॉर्मूले पर बनी सुभासपा-NDA में बात
अब गाजीपुर का जिक्र हुआ है तो यहां राजनीतिक गलियारों में गूंज रहे उस फॉर्मूले के बारे में भी बता दिया जाए, जिसको लेकर फिर से NDA में सुभासपा की एंट्री हुई है. मीडिया रिपोर्ट्स में चर्चा है कि सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर ने NDA में शामिल होने को लेकर तीन सीटों की मांग की है. इन तीन में से एक सीट गाजीपुर भी है, जहां अंसारी परिवार का दबदबा रहा है. इसके अलावा घोसी दूसरी सीट है, जिसकी मांग ओमप्रकाश राजभर ने की होगी.

वहीं राजनीतिक गलियारों में चर्चा ये भी है कि तीसरी सीट राजभर ने बिहार में मांगी है. वो सीट अगर नहीं मिलती है तो उसकी जगह यूपी में ही चंदौली या आजमगढ़ की लालगंज सीट दिए जाने की बात राजभर ने की होगी. इन सीटों पर अगर राजभर वाकई में जीत दर्ज करने के मूड में हैं तो उन्हें अंसारी परिवार के साथ की जरूरत होगी. अगर अंसारी परिवार के समर्थन के बूते ही NDA ने सुभासपा को कबूला है तो घूम कर बात उसी सवाल पर आ जाती है कि फिर बीजेपी की उस नीति का क्या होगा, जिसमें उसने मुख्तार से माफियाओं को मिट्टी में मिलाने की बात की थी.

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