इस बार सावन मास में दुर्लभ संयोग, एक साथ पूजे जाएंगे भोलेनाथ के साथ विष्‍णु, जानें पूजा विधि

हिंदू संवत्सर के श्रावण मास का शुभारंभ 4 जुलाई से हो रहा है। इस साल श्रावण मास में पवित्र पुरुषोत्तम महीना का संयोग बन रहा है। इसके चलते श्रावण महीना 30 दिनों की बजाय 59 दिनों तक मनाया जाएगा। हर साल श्रावण महीना में चार अथवा पांच सोमवार पर भोलेनाथ की विशेष पूजा की जाती है, इस बार आठ सोमवार पड़ रहा है। आठों सोमवार को शिव मंदिरों में रुद्राभिषेक किया जाएगा और विविध सामग्री से शिवलिंग का मनमोहक श्रृंगार किया जाएगा। श्रावण महीने में पुरुषोत्तम मास का संयोग बनने से पूजा, पाठ में इस माह का महत्व कई गुणा बढ़ गया है।

प्रत्येक तीन साल बाद आता है पुरुषोत्तम महीना

ज्योतिषाचार्य  के अनुसार हिंदू पंचांग के पूरे 12 महीनों में कई बार ऐसा होता है कि दो तिथि एक ही दिन पड़ती है। कई बार एक तिथि दो दिन पड़ती है। तिथियों के घटने-बढ़ने के कारण 12 महीनों में लगभग 10-11 दिन घट जाते हैं। दिन घटने से हिंदू संवत्सर लगभग 354 दिनों का होता है। इस तरह तीन साल में 30 से 33 दिन घट जाते हैं। इस अंतर के चलते पूरे 12 माह में संतुलन बनाने के लिए तीन साल बाद कोई ना कोई महीना 55 से 60 दिनों का होता है। इसे ही धर्म ग्रंथों में पुरुषोत्तम मास कहा गया है।इस अतिरिक्त महीने में भगवान विष्णु की पूजा का विधान है।

पर्व-त्यौहारों में 15 से 20 दिनों का अंतर

इस साल 59 दिनों तक श्रावण मास होने से पर्व-त्यौहारों में भी पिछले साल की अपेक्षा 15 से 20 दिनों का अंतर आ रहा है। इस साल अभी तक जो पर्व मनाए गए, वे पिछले साल की अपेक्षा 15 दिन पहले मनाए गए। अब श्रावण महीना समाप्त होने के बाद कुछ पर्व, त्यौहार पिछले साल की अपेक्षा 15 दिन बाद पड़ेंगे।

श्रावण 4 जुलाई से 31 अगस्त तक

– 4 जुलाई से 17 जुलाई तक साधारण श्रावण मास के 15 दिन

– इसके पश्चात 18 जुलाई से 16 अगस्त तक पुरुषोत्तम मास

– इसके पश्चात 17 अगस्त से 31 अगस्त तक साधारण श्रावण मास के शेष 15 दिन

एक साथ पूजे जाएंगे विष्णु-शंकर

श्रावण महीने में भगवान शंकर की पूजा का महत्व है, पुरुषोत्तम मास में भगवान विष्णु की पूजा का। चूंकि श्रावण महीने में ही पुरुषोत्तम मास का संयोग है इसलिए श्रावण महीने में भगवान भोलेनाथ और भगवान विष्णु की पूजा साथ-साथ की जाएगी।

पांच माह का चातुर्मास

श्रावण माह दो बार होने से चातुर्मास भी पांच महीने तक चलेगा। 29 जून से देवशयनी एकादशी पर चातुर्मास का शुभारंभ हो चुका है, जिसका समापन 23 नवंबर को देवउठनी एकादशी पर होगा।

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