राजधानी में अवैध प्लाटिंग? : भू-माफिया काट रहे चांदी; बिल्डर की दबंगई, ले आउट को लेकर उठे सवाल!

रायपुर। राजधानी रायपुर में भूमाफियाओं के हौसले बुलंद हैं। प्रशासन की नाक के नीचे निगम क्षेत्र के भीतर ही कुछ बिल्डर अपनी रसूख के चलते अवैध तरीके से प्लाटिंग करने में लगे हुए हैं। कई तो ऐसे भी हैं जो निगम और तहसील ऑफिस के नोटिस को भी ज्यादा तवज्जो नहीं देते हैं। ऐसा ही एक मामला राजधानी के अमलीडीह इलाके का सामने आया हैं। जहाँ एक बिल्डर नगर निगम और जिला प्रशासन को धता बताकर अपनी मनमानी करने में लगा हुआ हैं।
बताया जा रहा हैं कि मेडिशाइन हॉस्पिटल के पास अलौकिक धाम से लगी हुई करीब 10 एकड़ जमीन पर अवैध प्लॉटिंग की जा रही है। जानकारी के मुताबिक नगर निगम की टीम ने इस अवैध प्लॉटिंग पर रोक लगाते हुए नोटिस जारी किया था। आसपास के रहवासियों के अनुसार इस कार्रवाई के दो दिन बाद बिल्डर ने इस जमीन पर फिर से अवैध प्लॉटिंग शुरू कर दी है। इस जमीन के दो तरफ गिट्टी और मुरुम की लंबी सड़क बना दी गई है। जबकि इस मामले में तहसील दफ्तर से भी रिपोर्ट तैयार कर निगम के जोन कमिश्नर को भेजी जा चुकी है। सूत्रों के मुताबिक़ बिल्डर की दबंगई को देखते हुए जिला प्रशासन के अधिकारी अब इस भूमि से संबंधित खसरा नंबर को ब्लॉक करने की तैयारी में है। वही बिल्डर लगातार अपने राजनितिक रसूख के चलते मनमानी करने में लगा हुआ हैं।

वहीँ दूसरी तरफ निगम के ज़ोन दफ्तर के अधिकारीयों का कहना हैं कि अवैध प्लॉटिंग की शिकायत मिलने के बाद तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित बिल्डर को नोटिस जारी कर तहसील को भी सूचना भेजी गई थी। वहां से एक रिपोर्ट आई है, जिसमें बटांकन के दस्तावेज भी नहीं है। अब बटांकन के दस्तावेज देखकर ही आगे की कार्रवाई करेंगे। बहरहाल शिकायतों पर जहाँ जांच कराने की बात सामने आ रही हैं, वहीँ दूसरी तरफ बिल्डर्स अपने सड़क निर्माण कार्य भी किये जा रहे हैं।
गौरतलब है कि अवैध प्लाटिंग, अतिक्रमण और अवैध निर्माण की शिकायत पर निगम प्रशासन ने दिसंबर-2021 में 200 से अधिक की सूची बनाई थी। शहर और आसपास के इलाके में अवैध प्लाटिंग करने वाले 200 से अधिक भू-माफिया, दलालों पर कार्रवाई के लिए निगम ने सूची बनाई थी। इनमें से 20 से अधिक के खिलाफ थाने में केस भी कराया था, लेकिन इसके बाद अधिकारियों ने चुप्पी साध ली है। पुलिस को न तो सूची दी गई है और न ही कार्रवाई के लिए कोई प्रयास किया जा रहा है।
भू-माफिया काट रहे चांदी
शहर और बाहरी क्षेत्र की बेशकीमती सरकारी और खाली जमीन पर भू-माफियाओं की नजरें गड़ी हैं। नगर निगम, जिला प्रशासन के लिए यह सिरदर्द साबित होने लगा है। जिस जमीन पर कब्जा करना होता है, उसे घेरने में जरा भी देर नहीं करते। बस चिंता रहती है क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों को साधने की। निगम क्षेत्र के अलावा आसपास के गांवों में भी भू-माफियाओं ने पकड़ बना ली है।
खेती की जमीन पर मुरुम डालकर बिना डायवर्सन कराए अवैध प्लाटिंग धड़ल्ले से की जा रही है। शहर के कोटा, सेजबहार, डूंडा, सेमरिया, उमरिया, नवा रायपुर से लगे गांवों में अवैध प्लाटिंग हो रही है। एक भू-माफिया ने समाज सेवा की आड़ में कोटा, फाफाडीह में बेशकीमती सरकारी जमीन को घेर दिया है। इसकी जानकारी जब दो जनप्रतिनिधियों को लगी तो वे अपना हिस्सा मांग बैठे। भू-माफिया ने फायदे को ध्यान में रखकर मोटी रकम भेंट कर विरोध को दबा दिया।
निशाने पर नेताजी : राजधानी और आसपास के इलाकों में करोड़ों की बेशकीमती जमीन को सस्ते में खरीदकर सूबे के एक नेताजी इन दिनों केंद्रीय जांच एजेंसी के निशाने पर आ गए हैं। नेताजी ने दूसरों की जमीन तो खरीदी ही, अपने रिश्तेदारों तक को नहीं छोड़ा। उसमें भी बड़ा गड़बड़झाला है। बताया जा रहा है कि एक रिश्तेदार की करीब दो एकड़ जमीन नेताजी ने लाख रुपये एकड़ में खरीदी है, जबकि उसकी सरकारी कीमत करीब 10 लाख रुपये प्रति एकड़ है। कुछ साल पहले तक इस नेताजी की चल और अचल संपत्ति लाखों में थी, जो आज अरबों में पहुंच चुकी है। नेताजी की तेजी से बढ़ी संपत्ति उसके ही कुछ करीबियों को नागवार गुजरी, सो इसकी शिकायत केंद्रीय जांच एजेंसी से कर दी। खबर है कि इस शिकायत को आधार बनाकर एजेंसी एक्शन के मूड में है। देखना यह है कि नेताजी पर कार्रवाई की गाज कब और कैसे गिरती है