मुंबई : मुगलिया सल्तनत के बादशाह अकबर ने अपनी वीरता से हर जंग फतेह की लेकिन उनके घर में वैचारिक मतभेद को लेकर जो जंग चल रही है, उसमें उनकी एक न चली। वेब सीरीज ‘ताज’ बताती है कि सत्ता के लिए दूसरों का खून बहाना बहुत आसान होता है, लेकिन जब अपने परिवार के बीच खूनी खेल खेलने की साजिश रची जा रही हो तो एक बाप मजबूर हो जाता है।
सीरीज के दूसरे सीजन में अकबर की बेबसी और लाचारी दिखाई गई है, लेकिन एक बादशाह इसे जाहिर नहीं कर सकता क्योंकि वह पूरी सल्तनत का बादशाह होता है। देखा जाए तो सीरीज की असली कहानी दूसरे सीजन में शुरू हुई है।
हले सीजन में कहानी जहां खत्म होती है वहीं से दूसरी कहानी शुरू होती है। लेकिन, कहानी में 15 साल का अंतराल आ चुका है। सुल्तान सलीम के बेटे खुसरव और खुर्रम बड़े हो चुके है। अकबर के छोटे बेटे दानियाल को लगता है कि सल्तनत का उत्तराधिकारी वह खुद ही है।
सल्तनत के उत्तराधिकारी का दावेदार तो सलीम का बेटा खुसरव भी है लेकिन दानियाल को खुसरव से डर नहीं लगता। कहानी में जबरदस्त मोड़ तब आता है, जब शेख सलीम चिश्ती की सलाह पर अकबर अपने बड़े बेटे सलीम को वापस बुलाता है।
अकबर चाहते है कि सलीम सारी बुरी आदतें छोड़कर सिर्फ सल्तनत के बारे में सोचे लेकिन सलीम को अकबर के खौफ का डर नहीं। दानियाल पहले से ज्यादा क्रूर हो चुका है और सलीम को अपने रास्ते से हटाने की सोचता है।
पहले सीजन की तुलना में सीजन दो काफी प्रभावशाली लगता है। बादशाह अकबर किसी भी बाहरी खतरे की तुलना में, बहुत अधिक पारिवारिक तनाव के चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहा है। पहले सीजन की अपेक्षा दूसरे सीजन में एक्शन कम है और पटकथा पर विशेष रूप से ध्यान दिया गया है।
इस बार सीरीज के मेकर्स ने बहुत सारी गलतियां सुधारने की कोशिश की हैं, जो पहले सीजन में दिखी। पहले सीजन में बादशाह अकबर की भूमिका में नसीरुद्दीन शाह ने काफी निराश किया,
लेकिन इस बार उनकी परफॉर्मेंस खूब निखर कर आई है। एक दिक्कत पहले सीजन के साथ ये भी रही कि इसकी तुलना फिल्म ‘मुगल ए आजम’ से की गई।
सीरीज के पहले सीजन ‘ताज डिवाइडेड बाय ब्लड’ बादशाह अकबर के उस उत्तराधिकारी की खोज के बारे में थी जो मुगलिया सल्तनत को संभाल सके।
लेकिन बादशाह अकबर की जो आभा रही है उसे नसीरूद्दीन शाह पेश नहीं कर पाए थे। लेकिन सीरीज के दूसरे सीजन में बादशाह अकबर के दूसरे पक्ष को दिखाया गया है जिससे दर्शक अभी तक अनजान हैं।
एक बादशाह पिता भी होता है, बादशाह और पिता के चरित्र को नसीरुद्दीन शाह दूसरे सीजन में बहुत ही स्वाभाविक और संयम तरीके से निभाया है।