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22 महीने में OTT के वेब सीरीज और फिल्मों को लेकर मिलीं 13 श‍िकायतें, सेल्फत रेगुलेशन पर सरकार ने कही ये बात

BOLLYWOOD May 8, 2023 रिपोर्टर: shailesh
22 महीने में OTT के वेब सीरीज और फिल्मों  को लेकर मिलीं 13 श‍िकायतें, सेल्फत रेगुलेशन पर सरकार ने कही ये बात

22 महीने में OTT के वेब सीरीज और फिल्मों को लेकर मिलीं 13 श‍िकायतें, सेल्फत रेगुलेशन पर सरकार ने कही ये बात

मुंबई : ओटीटी पर रिलीज होने वाली वेब सीरीज और फिल्‍मों को लेकर सेंसरश‍िप की बहस नई नहीं है। मौजूदा वक्‍त में भी हर हफ्ते अलग-अलग ओटीटी प्‍लेटफॉर्म पर ऐसी सीरीज और फिल्‍में लगातार रिलीज हो रही हैं, जिनमें ‘इंटीमेट सीन’, ‘गाली-गलौज’, ‘शराब के सेवन’ और ‘खून-खराबा’ को देखकर दिमाग सुन्‍न रह जाए। आलम यह है कि बिना पूरी जानकारी के किसी फिल्‍म या सीरीज को घर में परिवार वालों के साथ देखना शर्मिंदगी का कारण बन जाता है। लेकिन दिलचस्‍प है कि आईबी मंत्रालय यानी सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को ऐसा नहीं लगता। ओटीटी पर विवाद और आजादी की बहस के बीच मंत्रायल के संयुक्‍त सचिव विक्रम सहाय कहा कहना है कि ओटीटी पर ‘सेल्‍फ रेगुलेशन’ ने हालात को बेहतर बना दिया है।

मंत्रालय की ओर से यह बयान ऐसे समय में आया है, जब पिछले दिनों ओटीटी पर ‘विक्रांत रोणा’ और ‘सास, बहू और फ्लेमिंगो’ जैसी सीरीज रिलीज हुई है। इतना ही नहीं, इन सब से पहले ‘सेक्रेड गेम्स’, ‘तांडव’ और ‘मिर्जापुर’ से लेकर ‘ए सूटेबल बॉय’ जैसे शोज के निर्माताओं के खिलाफ शिकायतें भी दर्ज हुई हैं। मुंबई में FICCI फ्रेम्स 2023 में ‘डिजिटल मीडिया: टेकिंग स्‍टॉक ऑफ सेल्‍फ रेगुलेशन’ पर चर्चा के दौरान विक्रम सहाय पैनलिस्ट के तौर पर मौजूद थे।

’22 महीने में ओटीटी कॉन्‍टेंट के ख‍िलाफ मिलीं 13 शिकायतें’

प्रोड्यूसर मधु भोजवानी, शिकायत निवारण बोर्ड के सदस्य भी हैं। उन्‍होंने कार्यक्रम के दौरान दो साल तक बोर्ड का हिस्‍सा बनने के अपने अनुभव के बारे में बताया। वह कहते हैं, ‘मुझे लगता है कि 2021 में, जब आचार संहिता वाला दस्तावेज जारी किया गया था, तब बहुत ने इस पर घबराहट जताई थी। लेकिन मुझे लगता है कि मेकर्स कम्‍यूनिटी से इसे बहुत अच्छी तरह से लिया है। जब आईएमएआई (इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया) ने मुझे बोर्ड में शामिल किया तो मुझे बहुत खुशी हुई। मुझे यह जानने का मौका मिला कि लोग जो शिकायतें कर रहे हैं, वह क्‍या हैं।’

शिकायतों के बारे में बात करते मधु भोजवानी कहते हैं, ‘पिछले 22 महीनों में केवल 13 शिकायतें आई हैं। मंत्रालय की सलाह पर दो समीक्षाएं हुई हैं। मुझे लगता है कि 2021 से पहले जितने मुकदमे और व‍िवाद थे, उनमें से कई अनजाने में दायर किए जा रहे थे। उस समय क्रिएटर्स के बीच काफी चिंता थी, लेकिन 2021 के बाद एक बार जब यह नियामक ढांचा लागू हो गया, तो एक फिल्टर बन गया है। आने वाली शिकायतों का भी समाधान किया जा रहा है। जब फर्स्‍ट लेवल पर श‍िकायतों का समाधान और सुधार नहीं होता है, तो वह हमारे पास सेकेंड लेवल में आता है।’

‘लोगों के पास शिकायतें हैं, तो उनके पास अब एक फोरम है’

आईबी मंत्रालय के संयुक्त सचिव, विक्रम सहाय कहते हैं, ‘जब सेल्‍फ रेगुलेशन के स्‍ट्रक्‍चर की शुरुआत हुई, तो यह साफ नहीं था कि क्या करना है, क्योंकि OTT का प्‍लेटफॉर्म अलग है। हम यहां विदेशों के विचारों से जूझ रहे थे और हमारे पास कई विकल्प थे। कुछ लोगों ने कहा कि ओटीटी पर आने वाली फिल्मों को पहले से सर्टिफाइड होना चाहिए। हमारे पास एक सिंगापुर मॉडल भी था, जहां उनके पास डिजिटल मीडिया अथॉरिटी है। हमारे पास ऑस्ट्रेलिया का एक ई-कमीशन मॉडल भी था। हमने उन सभी विकल्पों पर गौर किया और कहा कि नहीं, सरकार को फिल्मों और वेब सीरीज के निर्माताओं पर बहुत भरोसा और विश्वास है। उस विश्वास के साथ हमने शिकायतों के समाधान के लिए एक मजबूत स्‍ट्रक्‍चर बनाया। ताकि अगर आम लोगों को कोई शिकायत है, तो उनके पास एक फोरम है।’

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