रायपुर. राजधानी में साइबर ठगी का बड़ा मामला सामने आया है. ठगों ने एक कंपनी के अधिकृत अधिकारी के नाम से फर्जी वाट्सएप प्रोफाइल बनाकर दो करोड़ रुपए दूसरे खाते में ट्रांसफर करा लिए. हालांकि, कंपनी की ओर से ठगी का पता चलते ही डेढ़ से दो घंटे के भीतर बैंक और साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत कर दी गई. इससे पुलिस और संबंधित एजेंसियां ठगों के कई बैंक खातों में रकम रोकने में सफल रहीं. अब तक करीब एक करोड़ रुपए होल्ड कराए जाने की जानकारी सामने आई है, जबकि शेष रकम निकाल लिए जाने की आशंका है.
मामले में तेलीबांधा पुलिस ने धोखाधड़ी की धारा 318(4) के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. शिकायत वंकाल केबल्स एंड ट्रांसमिशन लिमिटेड के मुख्य वित्त अधिकारी ओमकार वरु ने दर्ज कराई है. कंपनी का कार्यालय तेलीबांधा स्थित मैग्नेटो मॉल में है.
कोलकाता के बैंक खाते में ट्रांसफर कराई रकम
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ठगों ने कंपनी से जुड़े अधिकृत व्यक्ति के मोबाइल नंबर और पहचान का इस्तेमाल कर फर्जीवाड़ा किया. अधिकारी के नाम से वाट्सएप पर फर्जी प्रोफाइल तैयार की गई और उसके जरिए पैसे ट्रांसफर करने के निर्देश दिए गए. इन निर्देशों पर कंपनी की ओर से दो करोड़ रुपए बताए गए बैंक खाते में भेज दिए गए.
पुलिस की पड़ताल में पता चला कि जिस खाते में रकम ट्रांसफर की गई, वह कोलकाता का है. आरोपियों ने खाते में रकम आने के बाद उसे अन्य खातों में भी ट्रांसफर किया. शिकायत दर्ज होने से पहले ही करीब एक करोड़ रुपए अलग-अलग खातों से निकाले जाने की जानकारी सामने आई है.
समय पर शिकायत से एक करोड़ रुपए रुके
ठगी का पता चलते ही कंपनी ने संबंधित बैंक को ईमेल भेजकर घटना की जानकारी दी. इसके साथ ही साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई गई. त्वरित कार्रवाई के चलते ठगी की रकम में से करीब एक करोड़ रुपए होल्ड करा दिए गए. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि ठगी में किन लोगों की भूमिका रही और रकम किन-किन खातों में भेजी गई.
एसीपी सिविल लाइंस रमाकांत साहू के मुताबिक, मामले में 17 अक्टूबर को एफआईआर दर्ज की गई है. कंपनी से जुड़े अधिकृत व्यक्ति की पहचान और मोबाइल नंबर का इस्तेमाल कर धोखाधड़ी की गई है. मामले की तकनीकी जांच जारी है.
कई बैंक खाते सीज, आरोपियों की तलाश जारी
रायपुर पुलिस ने बताया कि आरोपियों का पता लगाने के लिए तकनीकी जांच की जा रही है. कई बैंक खातों को सीज कराया गया है. घटना के तुरंत बाद साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत मिलने से करीब एक करोड़ रुपए समय रहते होल्ड कराए जा सके. पुलिस अब आरोपियों की पहचान करने के साथ ठगी की शेष रकम का पता लगाने में जुटी है.