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इंद्रावती रिजर्व में घूम रहे 8 बाघ : इनकी गतिविधियों पर नजर रखने हर वनमंडल में बनेगा टाइगर मूवमेंट सेल

Chhattisgarh September 14, 2026 रिपोर्टर: shailesh
इंद्रावती रिजर्व में घूम रहे 8 बाघ : इनकी गतिविधियों पर नजर रखने हर वनमंडल में बनेगा टाइगर मूवमेंट सेल

इंद्रावती रिजर्व में घूम रहे 8 बाघ : इनकी गतिविधियों पर नजर रखने हर वनमंडल में बनेगा टाइगर मूवमेंट सेल

जगदलपुर : बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा, बस्तर एवं कोठागांव जिले में सालभर से बाघ देखे जाने की घटनाएं सामने आ रही है। हालांकि वन विभाग अभी यह पक्के तौर पर बताने की स्थिति मे नहीं है कि यह एक ही बाघ है या अलग-अलग। फिलहाल बाघ के मूवमेंट को देखते हुए संबंधित हर वन मंडल में बाघ की गतिविधियों पर करीबी नजर रखने के लिए टायगर मूवमेंट सेल बनाने को फैसला लिया। गया है।

वैसे इन जिलो में देखे गए बाघ के अलावा इंद्रावती टायगर रिजर्व में 7-8 बाघ होने की संभावना है। व्यवस्था को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए है। बता दे कि बाघ वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत संरक्षित वन्यजीव है। बाघ के मूवमेंट सामने आने के बाद संभाग के सातों जिलो के वन अधिकारियों को निर्देश दिए गए है कि बाघ की सुरक्षा को केवल मोनिटरिंग तक सीमित न रखते हुए निगरानी, मानव- वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम, वैज्ञानिक डाटा संग्रहण और त्वरित प्रतिक्रिया पर विशेष ध्यान दिया जाए।

छत्तीसगढ़ के वनमंडलों में टाइगर मूवमेंट सेल स्थापित करने के आदेश

प्रत्येक संबंधित वनमंडल में वनमंडलाधिकारी के प्रत्यक्ष देखरेख में तत्काल टायगर मूवमेंट सेल स्थापित किए जाएं। संबंधित उप वनमंडलाधिकारी को इसका नोडल अधिकारी बनाया जाएगा। वहीं सभी परिक्षेत्र अधिकारियों एवं बीट अधिकारियों की स्पष्ट जिम्मेदारी निर्धारित की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर वन्यप्राणी वृत्त कार्यालय से समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए गए है।

लोकेशन सार्वजनिक नहीं करने के निर्देश

बाघ की लोकेशन को सार्वजनिक रूप से प्रसारित नहीं करने के निर्देश दिए गए है। अधिकारियों के अनुसार लोकेशन सार्वजनिक होने से अनावश्यक भीड़ और दबाव बढ़ सकता है, जिससे बाघ तथा आम लोगों दोनों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। पुख्ता सूचना के लिए सूचना तंत्र विकसित करने तथा सूचना देने वाले व्यक्तियों की पहचान गोपनीय रखने के निर्देश भी दिए गए है। साथ ही बाघ द्वारा पालतू पशुओं के मारे जाने की सूचना मिलने पर वन अमले को तत्काल मौके का निरीक्षण करना होगा। ठोस एवं पुख्ता प्रमाणों के आधार पर वन्यप्राणी की पहचान होने पर मुआवजा प्रकरण तत्काल तैयार कर भुगतान सुनिश्चित करने को कहा गया है।

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