बस्तर: झीरम घाटी हत्याकांड पर एनआईए कोर्ट में दोनों पक्षों की दलीलें पूरी हो चुकी हैं. ऐसा माना जा रहा था कि आज 31 अगस्त को फैसला आ जाएगा. लेकिन अब कोर्ट ने इस मामले में फैसले के लिए 5 सितंबर की तारीख तय कर दी है. 13 साल पहले हुए झीरम घाटी कांड को लेकर सियासत थमने का नाम नहीं ले रही है.
भूपेश बघेल जांच ने नाखुश
इस मामले को लेकर कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का कहना है कि NIA ने जांच सही नहीं की है. दरभा थाने में जिनके नाम पर FIR दर्ज किया गया उनसे पूछताछ हुई नहीं की गई, NIA कोर्ट ने गुडसा उसेंडी से बयान लेने कहा, लेकिन उन्होंने बयान नहीं लिया. साथ ही झीरम घाटी कांड में जो लोगो मौके पर मौजूद थे उन सब से भी पूछताछ नहीं किया गया. कांड के पीछे के षड्यंत्र कारियों तक पहुंचने एकदम भी नहीं रखा गया. जब जांच सही तरीके से नहीं हुई है तो कोर्ट फैसला भी उसी आधार पर करेगा तो रिपोर्ट है.
भाजपा मामले को दबाने का कार्य कर रही-भूपेश
उन्होंने आगे कहा कि मैंने मुख्यमंत्री रहते मध्यक्षेत्र की बैठक के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री से कहा था कि आप जांच नहीं कर पा रहे हैं तो हमें दे दीजिए, लेकिन नहीं दिया गया, जब हमने एसआईटी गठित की तो NIA हाईकोर्ट पहुंच गई, हमने सुप्रीम कोर्ट में अपील की तो राज्य सरकार के पक्ष में फैसला आया तब तक हमारी सरकार चली गई. लेकिन इसके बाद आई वर्तमान सरकार ने ना ही जांच के आदेश दिए न कुछ किया, जिसे देखकर लगता है कि भाजपा मामले को दबाने का कार्य कर रही है.
यह है पूरा मामला
दरअसल, बस्तर जिले के दरभा घाटी के पास 25 मई 2013 को नक्सलियों द्वारा कांग्रेस के काफिले पर किया गया एक अत्यंत घातक और चर्चित हमला था. नक्सलियों द्वारा किए गए हमले में बस्तर टाइगर महेंद्र कर्मा, तत्कालीन PCC अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, वरिष्ठ नेता विद्याचरण शुक्ल, उदय मुदलियार समेत कांग्रेस के कई नेताओं की जान चली गई थी.