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राष्ट्रीय हाथकरघा दिवस पर जशपुर की समृद्ध हाथकरघा संस्कृति को मिली नई पहचान, घोलेंग में पारंपरिक वेशभूषा में महिलाओं ने मनाया उत्सव, हाथकरघा एवं बांस उत्पादों की लगाई आकर्षक प्रदर्शनी

Chhattisgarh August 7, 2026 रिपोर्टर: shailesh
राष्ट्रीय हाथकरघा दिवस पर जशपुर की समृद्ध हाथकरघा संस्कृति को मिली नई पहचान, घोलेंग में पारंपरिक वेशभूषा में महिलाओं ने मनाया उत्सव, हाथकरघा एवं बांस उत्पादों की लगाई आकर्षक प्रदर्शनी

राष्ट्रीय हाथकरघा दिवस पर जशपुर की समृद्ध हाथकरघा संस्कृति को मिली नई पहचान, घोलेंग में पारंपरिक वेशभूषा में महिलाओं ने मनाया उत्सव, हाथकरघा एवं बांस उत्पादों की लगाई आकर्षक प्रदर्शनी

रायपुर : राष्ट्रीय हाथकरघा दिवस के अवसर पर जशपुर जिले के घोलेंग ग्राम पंचायत स्थित आजीविका परिसर में पारंपरिक हाथकरघा कला और स्थानीय संस्कृति का जीवंत रंग देखने को मिला। स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा धारण कर हर्षाेल्लास के साथ राष्ट्रीय हाथकरघा दिवस मनाया। कार्यक्रम में हाथकरघा आधारित आजीविका से परंपरागत रूप से जुड़े लगभग 35 से 40 परिवारों की महिलाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

इस अवसर पर महिलाओं ने हाथकरघा से निर्मित शॉल, पारंपरिक आभूषण तथा बांस से तैयार विभिन्न उपयोगी एवं आकर्षक उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई। प्रदर्शनी के माध्यम से जशपुर की स्थानीय कला, शिल्प, परंपरा और ग्रामीण महिलाओं के हुनर को प्रदर्शित किया गया। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि पारंपरिक हाथकरघा केवल सांस्कृतिक विरासत ही नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों के लिए स्थायी आजीविका और आर्थिक सशक्तिकरण का महत्वपूर्ण माध्यम भी बन सकती है।

आधुनिक सुविधाओं से सशक्त होगा पारंपरिक हस्तकरघा क्षेत्र

जिला प्रशासन द्वारा घोलेंग स्थित आजीविका परिसर में हैंडलूम प्रशिक्षण एवं उत्पादन केंद्र का निर्माण कराया जा रहा है। इस केंद्र के माध्यम से हाथकरघा क्षेत्र से जुड़े परिवारों को आधुनिक मशीनरी एवं तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार, लैब टेस्टिंग, आधुनिक डिजाइन और बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।  केंद्र के जरिए जशपुर की पारंपरिक हाथकरघा कला को आधुनिक तकनीक एवं बाजार की मांग के अनुरूप विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। इससे स्थानीय कारीगरों और स्व सहायता समूहों को अपने उत्पादों को व्यापक बाजार तक पहुंचाने के अवसर मिलेंगे और उनकी आय में वृद्धि की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।

प्रशिक्षण से डिजाइन और बाजार तक बनेगी पूरी व्यवस्था

आदित्य बिरला समूह के प्रबंधन एवं सहयोग से प्रशिक्षण, उत्पादन, डिजाइन विकास तथा बाजार से जुड़ी गतिविधियों को प्रभावी बनाने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। इसका उद्देश्य स्थानीय महिलाओं और कारीगरों के पारंपरिक कौशल को निखारते हुए उन्हें आधुनिक उत्पादन तकनीक और बाजार की बदलती जरूरतों से जोड़ना है। हाथकरघा एवं बांस उत्पादों की प्रदर्शनी में स्थानीय महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों ने आकर्षित किया। इन उत्पादों में स्थानीय परंपरा और आधुनिक उपयोगिता का सुंदर समन्वय देखने को मिला।

महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

कार्यक्रम में बिहान के जिला दल से डीएमएम, डीपीएम, आदित्य बिरला समूह के परिसर प्रमुख एवं प्रशिक्षक सहित स्व सहायता समूहों से जुड़ी सैकड़ों दीदियां उपस्थित रहीं। महिलाओं ने पारंपरिक हस्तकरघा कला को संरक्षित करने, स्थानीय शिल्प को नई पहचान दिलाने तथा आधुनिक बाजार से जोड़कर इसे आय का मजबूत साधन बनाने का संकल्प लिया।

राष्ट्रीय हाथकरघा दिवस पर घोलेंग में आयोजित यह आयोजन जशपुर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, स्थानीय हुनर और ग्रामीण आजीविका को एक मंच पर लाने वाली महत्वपूर्ण पहल बनकर सामने आया। प्रशिक्षण, उत्पादन, डिजाइन और बाजार की सुविधाओं से जुड़कर जशपुर का पारंपरिक हाथकरघा क्षेत्र आने वाले समय में स्थानीय परिवारों के लिए रोजगार एवं आय के नए अवसर सृजित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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