कोल लेवी घोटाले मे बड़ा खुलासा : काँग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष ने किया था 52 करोड़ 62 लाख 20 हजार रुपए की हेरा-फेरी

रायपुर। कोल लेवी घोटाला के फरार आरोपी कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल को ईओडब्लू ने बुधवार को गिरफ्तार कर गुरुवार को स्पेशल कोर्ट में पेश किया। ईओडब्लू के आवेदन पर कोर्ट ने रामगोपाल से पूछताछ करने 17 जुलाई तक पुलिस रिमांड स्वीकृत की है। जांच एजेंसी ने कोर्ट से 22 जुलाई तक रिमांड देने की मांग की थी। ईओडब्लू ने रामगोपाल अग्रवाल के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए हैं।

जांच एजेंसी के अनुसार, कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष ने 244 करोड़ रुपए के कोल लेवी घोटाले की रकम में से 52 करोड़ 62 लाख 20 हजार रुपए कलेक्शन करने के साथ मैनेज करने का काम किया है। जांच एजेंसी के आरोपों के अनुसार घोटाले की रकम को मैनेज करने उसके द्वारा अपने बेटे वैभव की कंपनी, फर्म में निवेश, मैनेज कर वैध दिखाने का प्रयास किया गया।

घोटाले की रकम से रामगोपाल के बेटे वैधव ने अकूत संपत्ति अर्जित की

जांच एजेंसी के आरोपों के अनुसार, घोटाले की रकम से रामगोपाल के बेटे वैधव ने अकूत संपत्ति अर्जित की। इसके साथ ही उसके द्वारा जो संपत्तियां खरीदी गई, उनका भुगतान कैश में किया गया। जांच एजेंसी के अनुसार तत्कालीन कोषाध्यक्ष होने के कारण राजनीतिक वित्तीय गतिविधियों से वह सीधे तौर पर जुड़ा था।

पार्टी के लिए फंडिंग करने का आरोप

राम गोपाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कोषाध्यक्ष के रूप में कार्यरत था। इस पद के कारण वह पार्टी की वित्तीय गतिविधियों, राजनीतिक फंडिंग, चुनावी खचों और संगठनात्मक खर्चों से जुड़ा हुआ व्यक्ति था। विवेचना में यह तथ्य सामने आया कि कोल लेवी सिंडीकेट से प्राप्त अवैध नकद राशि का बड़ा हिस्सा राजनीतिक फंडिंग और पाटी गतिविधियों के नाम पर रायपुर स्थित कांग्रेस भवन तक पहुंचाया जाता था, जहां से उक्त राशि का नियंत्रण और उपयोग राम गोपाल अग्रवाल करता था।

आईटी रेड पड़ने पर सूर्यकांत ने कोल वाशरी बेची

ईडी की जांच का हवाला देते हुए राज्य की जांच एजेसी ने कोर्ट को बताया है कि सूर्यकांत तिवारी को प्राप्त अवैध लेवी को मेसर्स इन्दरमणि ग्रुप के सुनील अग्रवाल द्वारा इंडस उद्योग एवं इन्फ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड तथा सत्या पॉवर एवं इस्पात लिमिटेड नामक कोल वाशरी को 96 करोड़ में क्रय कराया गया। इस बाशरी को खरीदने के लिये मां मड़वारानी कोल बेनिफिकेशन प्रा. लिमिटेड नामक कंपनी की स्थापना की गयी। इस कंपनी में सूर्यकांत तिवारी के साथ हेमंत जायसवाल फाउंडर मेंबर था, जिसकी 20 प्रतिशत की भागीदारी थी। सूर्यकांत तिवारी एवं उसके सहयोगियों के यहां आईटी रेड पड़ने पर सूर्यकांत तथा हेमंत द्वारा कोल लेवी वसूली पैसा से खरीदी गई उक्त बाशरी एवं अन्य अचल संपत्तियों को रातों रात सुनील अग्रवाल के पास बेच दिया गया।

घोटाला करने ऑनलाइन सिस्टम को एरर बताया

ईओडब्लू ने आरोप लगाया है कि, सूर्यकांत तिवारी ने अपने राजनीतिक प्रभाव का उपयोग कर तत्कालीन उप सचिव सौम्या चौरसिया, आईएएस समीर विश्नोई, तत्कालीन कोरबा कलेक्टर रानू साहू, खनिज विभाग के अधिकारी एवं अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर राजनीतिक हस्तियों के संरक्षण में अपराधिक षड्यंत्र किया। इन सभी ने मिलकर सिंडीकेट के रूप में कार्य किया। इसके बाद 15 जुलाई 2020 को खनिज के डीओ एवं ट्रांसपोर्ट परमिट को ऑनलाईन के स्थान पर मैनुअल पद्धति से जारी करने का आदेश पारित कराया। इसके लिए ऑनलाइन सिस्टम में एरर होना दर्शाया गया ।

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