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छत्तीसगढ़ के इस जिले से है भगवान राम का खास नाता, यहीं खाए थे शबरी के बेर

Chhattisgarh March 27, 2026 रिपोर्टर: shailesh
छत्तीसगढ़ के इस जिले से है भगवान राम का खास नाता, यहीं खाए थे शबरी के बेर

छत्तीसगढ़ के इस जिले से है भगवान राम का खास नाता, यहीं खाए थे शबरी के बेर

जांजगीर-चाम्पा : भगवान राम का छत्तीसगढ़ से गहरा नाता हैं. मर्यादा पुरूषोत्तम राम को यहां भांचा माना जाता है. वहीं जांजगीर-चाम्पा जिले से भगवान राम का बहुत करीब से नाता है. यहां प्रभु श्रीराम ने वनवास का समय बिताया है. मान्यता है कि यहां प्रभु श्री राम ने शबरी के जूठे बेर खाए थे.

शिवरीनारायण में भगवान राम ने खाए थे शबरी के बेर

जांजगीर-चांपा जिले की धार्मिक नगरी शिवरीनारायण को गुप्त प्रयाग कहा जाता है. यहां तीन नदी महानदी, शिवनाथ और जोक नदी का त्रिवेणी संगम है. शिवरीनारायण का नाम माता शबरी और नारायण के अटूट स्नेह के कारण पड़ा और भक्त का नाम नारायण के आगे रखा गया.

बड़े मंदिर यानि नर नारायण मंदिर के पुजारी बताते हैं कि शिवरीनारायण को छत्तीसगढ़ के जगन्नाथपुरी के नाम से जाना जाता है. मान्यता है कि इसी स्थान पर प्राचीन समय में भगवान जगन्नाथ स्वामी का मूल स्थान शिवरीनारायण रहा. आज भी साल में एक दिन माघी पूर्णिमा में भगवान जगन्नाथ शिवरीनारायण आते हैं, यहां मंदिर में रोहिणी कुंड है, जिसका जल कभी कम नहीं होता, भगवान नर नारायण के चरण कुंड में जल हमेशा अभिषेक करता है.

यहां एक पेड़ में पत्तों की आकृति दोने के सामान 

कहा जाता है कि यहां एक पेड़ ऐसा है जिसके पत्तों की आकृति दोने के सामान है. माता शबरी ने इसी दोने में राम लक्ष्मण को बेर रख कर खिलाए थे. इस वट वृक्ष का वर्णन सभी युगों में मिलने के कारण इसे अक्षय वट वृक्ष के नाम से जाना जाता है.

शिवरीनारायण मठ मंदिर के पुजारी त्यागी महराज ने बताया कि छत्तीसगढ़ मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का ननिहाल और उनकी कर्मभूमि भी है. 14 वर्षों के कठिन वनवास काल में श्रीराम ने अधिकांश समय छत्तीसगढ़ में ही बिताया. माता कौशल्या की जन्मभूमि के कारण छत्तीसगढ़ में श्रीराम को भांजे के रूप में पूजा जाता है.

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