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पति और उसके परिवार पर दहेज प्रताड़ना का झुठा केस दर्ज करवाना मानसिक क्रूरता : हाई कोर्ट

Chhattisgarh February 6, 2026 रिपोर्टर: shailesh
पति और उसके परिवार पर दहेज प्रताड़ना का झुठा केस दर्ज करवाना मानसिक क्रूरता : हाई कोर्ट

पति और उसके परिवार पर दहेज प्रताड़ना का झुठा केस दर्ज करवाना मानसिक क्रूरता : हाई कोर्ट

बिलासपुर : बिलासपुर हाई कोर्ट ने दहेज प्रताड़ना के एक मामले में टिप्पणी करते हुए कहा है, कि पति और उसके परिवार पर दहेज प्रताड़ना का झूठा केस दर्ज कराना मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है. जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की डिवीजन बेंच ने धमतरी फैमिली कोर्ट के फैसले को निरस्त करते हुए पति की तलाक की अर्जी को स्वीकार कर ली है.

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, धमतरी निवासी धर्मेंद्र साहू का विवाह 28 अप्रैल 2009 को संध्या साहू के साथ हिंदू रीति-रिवाजों से हुआ था. शादी के बाद उनकी दो बेटियां हुईं.

10 अप्रैल 2017 को पत्नी ने पति, देवर और सास के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए धारा 498ए के तहत एफआईआर दर्ज कराई. वह इसके बाद अपने मायके चली गई, और तब से वापस नहीं आई.

इसके करीब पांच साल बाद 2022 में पत्नी के आरोप साबित नहीं कर पाने के आधार पर धमतरी की कोर्ट ने पति और उसके परिजनों को बाइज्जत बरी कर दिया था.

इसके बाद पति ने फैमिली कोर्ट में मामला प्रस्तुत किया और क्रूरता के आधार पर तलाक मांगा था. धमतरी के फैमिली कोर्ट ने 17 अगस्त 2023 को मामला खारिज कर दिया था.

दहेज प्रताड़ना का झुठा केस दर्ज करवाना मानसिक क्रूरता – हाई कोर्ट

पति ने फैमिली कोर्ट के निर्णय के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की. हाई कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपने फैसले में कहा कि पति और उसके बुजुर्ग परिजनों ने 5 साल तक आपराधिक मुकदमे का सामना किया. गिरफ्तारी की आशंका और समाज में प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचना पति के लिए गंभीर मानसिक आघात जैसा है. कोर्ट ने कहा कि जब किसी व्यक्ति को झूठे आरोपों के कारण मुकदमे से गुजरना पड़ता है और वह अंततः बरी हो जाता है, तो यह नहीं माना जा सकता कि उसके साथ क्रूरता नहीं हुई.

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