उत्तर बस्तर में लाल आतंक अब भी जिंदा : जंगलों में छिपे 1 करोड़ के 28 नक्सली, जानें कांकेर पुलिस का एक्शन प्लान?

कांकेर : छत्तीसगढ़ के बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ जंग लंबे समय से जारी है. दशकों से चली आ रही इस लड़ाई में जवान और नक्सली आमने-सामने की टक्कर ले रहे हैं. सरकार द्वारा नक्सलवाद के पूर्ण उन्मूलन की तय डेडलाइन पूरी होने में अब सिर्फ 60 दिन का वक्त बचा है. ऐसे में नक्सली अपने वर्चस्व को बचाने के लिए जंगल-जंगल भटक रहे हैं. उत्तर बस्तर के बीहड़ इलाकों में अभी भी करीब 1 करोड़ रुपये के इनामी 28 नक्सली मौजूद हैं, जिनके खिलाफ कांकेर पुलिस अभियान तेज करने की तैयारी में है.
अबूझमाड़ से उत्तर बस्तर तक लाल आतंक का असर
बस्तर संभाग का अबूझमाड़ से जुड़ा उत्तरी इलाका लंबे समय से लाल आतंक के दर्द का गवाह रहा है. नक्सलियों ने इस क्षेत्र को अपना मजबूत और लगभग अभेद किला बना रखा था. हालांकि बीते कुछ महीनों में सुरक्षा बलों के साहस और रणनीतिक कार्रवाई से इस किले में सेंध लगी है और नक्सलियों को लगातार नुकसान उठाना पड़ा है.
डेडलाइन के बाद बढ़ा दबाव, कई नक्सलियों ने किया सरेंडर
केंद्र सरकार द्वारा नक्सलवाद की समाप्ति की मार्च 2026 डेडलाइन तय करने के बाद दबाव और बढ़ गया है. बड़ी संख्या में नक्सली सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाते हुए हथियारों के साथ मुख्यधारा में लौट रहे हैं. इसके बावजूद कुछ नक्सली अब भी जंगलों में भटककर अपनी दहशत बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं.
उत्तर बस्तर में बचे 28 इनामी नक्सली
कांकेर जिले में अभी भी 28 सक्रिय नक्सली बताए जा रहे हैं. इनमें परतापुर एरिया कमेटी के 13, कंपनी नंबर 5 के 11 और 4 पार्टी सदस्य शामिल हैं. इन सभी पर कुल मिलाकर करीब 1 करोड़ रुपये का इनाम घोषित है. इनमें 2 डिवीसीएम, 8 एसीएम समेत अन्य सक्रिय कैडर शामिल हैं.
कांकेर पुलिस की कार्रवाई
कांकेर में नक्सल ऑप्स सेल के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आकाश श्रीमाल के अनुसार, वर्ष 2025 में पुलिस-नक्सली मुठभेड़ों में 10 नक्सली मारे गए. इसी दौरान 31 नक्सली गिरफ्तार हुए और 51 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया. पुलिस ने इस अवधि में 48 हथियार भी बरामद किए.
अंतिम चरण में तेज होगा अभियान
अब जब केंद्र सरकार की तय डेडलाइन में करीब 60 दिन बचे हैं, कांकेर पुलिस बचे हुए नक्सलियों के खिलाफ अभियान और तेज करने के मूड में है. उद्देश्य यह है कि दशकों से नासूर बने नक्सलवाद की जड़ को पूरी तरह खत्म कर बस्तर क्षेत्र में विकास योजनाओं को गति दी जाए और लोगों को एक नई सुबह से जोड़ा जा सके.