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उदंती सीतानदी टाइगर रिज़र्व में दिखी जाइंट गिलहरी, पर्यटकों के कैमरे में हुई कैद

Chhattisgarh January 6, 2026 रिपोर्टर: shailesh
उदंती सीतानदी टाइगर रिज़र्व में दिखी जाइंट गिलहरी, पर्यटकों के कैमरे में हुई कैद

उदंती सीतानदी टाइगर रिज़र्व में दिखी जाइंट गिलहरी, पर्यटकों के कैमरे में हुई कैद

गरियाबंद : जिले के उदंती सीतानदी टाइगर रिज़र्व में विशाल काली गिलहरी दिखी है. मराठी में ‘शेकरू’ के नाम से मशहूर इंद्रधनुषी गिलहरी के नाम से भी जानी जाती है. टाइगर रिजर्व में पेड़ों के बीच लंबी-लंबी छलांग लगाते हुए दिखी जाइंट गिलहरी को वहां मौजूद पर्यटकों ने अपने कैमरे में कैद किया.

महाराष्ट्र की राजकीय पशु जाइंट इंद्रधनुषी गिलहरी मुख्य रूप से पश्चिमी घाट के जंगलों में पाई जाती है. विशाल गिलहरी पेड़ों के बीच लंबी छलांग लगाने की क्षमता के लिए मशूहर है. आमतौर पर भूरी, काली और कत्थई रंगों वाली विशाल गिलहरी सोमवार को गरियाबंद में देखी गई है.

पर्यटकों को पेड़ों पर उछल-कूदते दिखी विशाल गिलहरी

गौरतलब है इन दिनों उदंती टाइनर रिजर्व में वन्यप्राणियों की गणना चल रहा हैं. नए साल में पर्यटक यहां घूमने आ रहे है, जहां पर्यटकों को विशाल गिलहरी पेड़ों पर उछल-कूद करते हुए दिखाई दी, जिसे पर्यटकों ने अपने कैमरे में कैद कर लिया. प्रमुख रूप से महाराष्ट्र के जंगलों में पाई जाने वाली विशाल गिलहरी टाइगर रिजर्व में देखकर लोग पर्यटक चहक उठे.

हेल्दी फॉरेस्ट में रहना पसंद करते है विशाल गिलहरी

उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व के उप निदेशक वरुण जैन ने बताया कि गरियाबंद में जाइंट गिलहरी के मिलना इस बात का प्रतीक है कि यह घने जंगल और अच्छी बारिश वाला क्षेत्र है, क्योंकि विशाल गिलहरी हेल्दी फॉरेस्ट में रहना पसंद करते है. उन्होंने कहा कि भारतीय विशाल गिलहरी उदंती टाइग रिजर्व में मिलने से वन अमले में उत्साह है.

मालाबार जायंट गिलहरी के रूप जाने जानी वाली गिलहरी का बायोलॉजिकल नाम ‘राटुफा इंडिका’ है. विशाल गिलहरी की सिर से लेकर पूंछ तक लंबाई करीब 3 फीट तक होती है. काले, भूरे, पीले, नीले, लाल और नारंगी रंग के होने के चलते इसे इंद्रधनुषी गिलहरी पुकारते हैं.

घने जंगलों और खुले क्षेत्रों में जीवित रह पाती है 

आमतौर पर सुबह-शाम सक्रिय रहने वाली इंद्रधनुषी गिलहरियां दिन में सोती है. इसकी सबसे खास बात ये है कि नर और मादा विशाल गिलहरियां सिर्फ सहवास के लिए ही आपस में मिलते हैं. इसके अलावा नर-मादा कभी एक साथ नहीं रहते हैं. इंद्रधनुषी गिलहरियां केवल घने जंगलों, बागानों और खुले क्षेत्रों में भी जीवित रह पाती है.

36 फीट से ऊंचे पेड़ों पर घोंसला बनाकर रहती हैं

हिमालय से दक्षिणी/मध्य चीन, भारत, नेपाल, बांग्लादेश, म्यांमार, थाईलैंड, मलेशिया, इंडोनेशिया और फिलीपींस तक में पाई जाने वाली इंद्रधनुषी गिलहरियां शिकार होने से बचने के लिए आमतौर पर 36 फीट से ऊंचे पेड़ों के छेदों, चट्टानों की दरारों या वनस्पति के घोंसलों में रहती हैं.

एक पेड़ से दूसरे पेड़ के बीच 20 फीट से भी अधिक दूरी तक छलांग लगाने की क्षमता वाली जाइंट गिलहरी विशुद्ध शाकाहारी होती है और सामान्यतया पत्तियां, कोपलें, फूल, फल, नट्स, बीज, लाइकेन, काई, टहनियां, छाल पर आश्रित होती हैं.

एक साथ नहीं रहते है नर-मादा विशाल गिलहरी 

सिर्फ प्रजनन के लिए सहवास करने वाले नर-मादा विशाल गिलहरी कभी एक साथ नहीं रहते हैं. मादा इंद्रधनुषी गिलहरी प्रति वर्ष एक या दुर्लभ मामलों में दो शावकों को जन्म देती हैं. इन्हें दो महीने से अधिक स्तनपान कराती हैं. बड़ी बात यह है कि विशाल गिलहरियों का प्रजनन मौसम क्षेत्र के अनुसार बदलता है.

उन्हें शिकार से बचाती है उनका इंद्रधनुषी रंग

भारतीय जायंट गिलहरी यानी इंद्रधनुषी गिलहरियों का शिकार तेंदुए, लायन टेल्ड मकाउ बंदर, बाज, उल्लू, सांप करते हैं. माना जाता है कि विशाल गिलहरियों का इंद्रधनुषी रंग ही उन्हें जंगलों में उन्हें शिकार से बचाती है. काले और सफेद रंग की प्रजाति वाले विशाल गिलहरियां चीन के कुछ हिस्सों में पाई जाती हैं.

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