कोयले के अवैध खनन को रोकने के लिए CISF की 10 कंपनियां तैनात करे गृह मंत्रालय, हाईकोर्ट का आदेश

असम : कोयले के अवैध खनन और उससे जुड़े परिवहन को लेकर मेघालय उच्च न्यायालय ने चिंता जताई है। मेघालय हाईकोर्ट ने केंद्र के गृह मंत्रालय को कोयले के अवैध खनन और परिवहन पर रोक लगाने के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) की दस कंपनियों को तैनात करने का आदेश दिया है। मुख्य न्यायाधीश संजीब बनर्जी की अध्यक्षता वाली उच्च न्यायालय की पीठ ने बुधवार को इस मामले की एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बात कही।
कोयले के अवैध परिवहन को रोकने सीआईएसएफ करे तैनात
कोर्ट ने कहा कि सड़कों पर निगरानी रखने और राज्य में अवैध रूप से खनन किए गए कोयले के अवैध परिवहन को रोकने के लिए सीआईएसएफ की कंपनियों को तैनात किया जाए। गृह सचिव के माध्यम से गृह मंत्रालय को केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल की 10 कंपनियों की तैनाती सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया जाता है। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि इस मामले में गृह मंत्रालय की प्रतिक्रिया भी सचिव के माध्यम से उपलब्ध कराई जाए।
माल वाहनों की हो नियमित जांच
उच्च न्यायालय की पीठ ने निर्देश दिया कि सीआरपीएफ के बजाय जो राज्य पुलिस के नियंत्रण में काम करता है, वह काम करने के लिए उपयुक्त होगा जिसमें माल वाहनों की जांच भी शामिल है। आदेश में कहा गया है कि जब सीआईएसएफ वाहनों की जांच में लगा हुआ है, इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह कंट्राबेंड की भी जांच करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि माल वाहन मेघालय में राज्य और राष्ट्रीय राजमार्गों पर चलने के लिए भार सीमा के अनुरूप हों।
बता दें, भारत के डिप्टी सॉलिसिटर जनरल डॉ मोजिका ने अदालत में बताया था कि सीआईएसएफ राज्य में कोयले के अवैध परिवहन की जांच के लिए कंपनियों को तैनात करने के लिए तैयार नहीं है। इस पर अदालत ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि कोयले का अवैध खनन और परिवहन दोनों जारी है। अगर राज्य में कानून का शासन स्थापित करना है, तो सीआईएसएफ की कंपनियों द्वारा ही किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि सीआईएसएफ ने स्पष्ट रूप से मना किया है, लेकिन फिर भी उन्हें आदेश दिया जाता है कि वह जल्द ही 10 कंपनियों को तैनात करें। इस मामले में अगली सुनवाई 27 अप्रैल को होगी।