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धान की फसलों पर मंडराया खतरा, मौसम की करवट से बढ़ी किसानो की चिंता, भूरा माहू ने मचाई तबाही

Chhattisgarh October 31, 2025 रिपोर्टर: shailesh
धान की फसलों पर मंडराया खतरा, मौसम की करवट से बढ़ी किसानो की चिंता, भूरा माहू ने मचाई तबाही

धान की फसलों पर मंडराया खतरा, मौसम की करवट से बढ़ी किसानो की चिंता, भूरा माहू ने मचाई तबाही

बिलासपुर :  खरीफ सीजन की फसलों का अब अंतिम दौर चल रहा है। खेतों में सुनहरी बालियाँ लहराने लगी हैं, लेकिन मौसम की बदली हुई चाल ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। आसमान में लगातार मंडराते बादल और ठंडी हवाओं ने धान की फसल के लिए खतरे की घंटी बजा दी है।

बिलासपुर और आसपास के इलाकों में इस समय धान की फसलें पकने की स्थिति में हैं। आने वाले एक सप्ताह में कटाई शुरू होने की उम्मीद है। वहीं, लेट वैरायटी यानी देर से पकने वाली फसल में अभी दाना निकलने की प्रक्रिया जारी है। ऐसे में लगातार बादल छाए रहने और तापमान में गिरावट ने किसानों की नींद उड़ा दी है।मौसम की नमी और धूप की कमी ने खेतों में “भूरा माहो” (brown aphid) जैसे कीटों के पनपने के लिए अनुकूल माहौल बना दिया है।

किसानों से मिल रही जानकारी के मुताबिक, कई जगहों पर इन कीटों का हमला शुरू हो गया है। खेतों में धान के पौधे नीचे से सूखने लगे हैं, जबकि ऊपर से फसल हरी नजर आती है। यही कारण है कि किसान शुरू में धोखा खा जाते हैं, और जब तक समझ में आता है, तब तक फसल का बड़ा हिस्सा नुकसान झेल चुका होता है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि इस मौसम में नमी बनी रहने से कीटों की सक्रियता बढ़ जाती है। विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे रोज अपने खेतों का निरीक्षण करें और जहाँ भी कीट दिखें, वहाँ तुरंत प्रभावी कीटनाशी दवा का छिड़काव करें।

किसानों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर कीटों और रोगों का प्रकोप बढ़ गया, तो मेहनत की गई पूरी फसल पर असर पड़ेगा। अब सभी की निगाहें आसमान पर टिकी हैं।कब बादल छंटें और धूप निकले ताकि फसलें फिर से रोगमुक्त होकर सुरक्षित पक सकें।किसानों को फिलहाल यही सलाह दी गई है कि खेत पर नजर रखें, समय पर कदम उठाएँ, ताकि सालभर की मेहनत पर मौसम का साया न पड़ सके।

जानिए भूरा माहू के नुकसान

यह धान के पौधे के तने से रस चूसता है, जिससे पौधे का हरा रंग पीला पड़ने लगता है।

बढ़ते प्रकोप से पूरा पौधा सूख जाता है और ‘हॉपर बर्निंग’ की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

यह फसल की पैदावार को बहुत कम कर देता है।

जानें नियंत्रण के उपाय

कीटनाशकों का प्रयोग: सही समय पर और प्रभावी कीटनाशकों का छिड़काव करें। कई कीटनाशक जैसे डाईनेटियोफ्यूरोन और पाइमेट्रोजन का मिश्रण भूरे माहू पर प्रभावी होता है,

सही समय पर छिड़काव: धान रोपाई के लगभग 25 से 55 दिन के बीच कीटनाशक का छिड़काव करना प्रभावी हो सकता है, क्योंकि यह समय भूरे माहू के प्रकोप के लिए संवेदनशील होता है।

पानी का प्रबंधन: कीटनाशक के छिड़काव के 24 घंटे के भीतर खेत में 3 से 4 सेंटीमीटर पानी बनाए रखने से भी कीटनाशक का असर बेहतर होता है।

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