एसपी की कैंप रणनीति रंग लाई : सुकमा में खुले नए सुरक्षा कैंप, नक्सली गतिविधियों पर लगेगा अंकुश

सुकमा : छत्तीसगढ़ के सुदूर और अति संवेदनशील नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षाबलों को एक और बड़ी सफलता मिली है। पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण के नेतृत्व में सुकमा जिले के सीमावर्ती इलाके पालामडगू और गुंडाराजगुड़ेम में दो नए सुरक्षा कैंपों की स्थापना की गई है। यह कदम नक्सल उन्मूलन के साथ-साथ क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के उद्देश्य से उठाया गया है।

प्रशासन की संयुक्त पहल, विकास की ओर कदम

यह रणनीतिक पहल ‘‘नियद नेल्ला नार’’ योजना के तहत की गई है, जो छत्तीसगढ़ शासन द्वारा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के उन्नयन के लिए संचालित की जा रही है। इस ऑपरेशन का नेतृत्व कर रहे हैं बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी., दंतेवाड़ा रेंज के पुलिस उपमहानिरीक्षक कमलोचन कश्यप, सीआरपीएफ रेंज सुकमा के उपमहानिरीक्षक आनंद सिंह राजपुरोहित और अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण।

नक्सलियों की गतिविधियों पर लगेगा अंकुश

पालामडगू और गुंडाराजगुड़ेम जैसे माओवादियों के कोर जोन माने जाने वाले इलाकों में सुरक्षा बलों की उपस्थिति से नक्सलियों की अंतरजिला आवाजाही और गतिविधियों पर सख्त नियंत्रण संभव हो पाएगा। इन क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की मौजूदगी से न केवल आम नागरिकों को सुरक्षा का भरोसा मिला है, बल्कि स्थानीय ग्रामीण भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ने के लिए उत्साहित हैं।

ग्रामीणों को मिलेंगी बुनियादी सुविधाएं

नवीन सुरक्षा कैंपों की स्थापना से सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा, पीडीएस और मोबाइल नेटवर्क जैसी मूलभूत सुविधाएं अब इन दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच सकेंगी। इससे क्षेत्र में लंबे समय से ठप विकास कार्यों को गति मिलेगी और ग्रामीणों की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव आएगा।

नक्सल उन्मूलन में दिख रहा असर

इस रणनीति का सीधा असर नक्सली गतिविधियों पर भी पड़ा है। वर्ष 2024 से अब तक 518 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है, जबकि सुरक्षाबलों ने विभिन्न अभियानों में 64 माओवादियों को मुठभेड़ों में ढेर कर दिया है और 451 को गिरफ्तार किया है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि शासन और सुरक्षा बलों की संयुक्त कार्यवाही से नक्सलवाद की कमर टूटती नजर आ रही है।

जनता का भरोसा बढ़ा

स्थानीय ग्रामीणों ने सुरक्षा कैंपों की स्थापना का स्वागत करते हुए इसे “नई सुबह की शुरुआत” बताया है। ग्रामीणों का कहना है कि अब उन्हें अपने बच्चों की शिक्षा, इलाज और रोजगार के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा।

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