‘महाकुंभ राजनीति नहीं, भरोसे का अड्डा’: कुंभ में वीआईपी कल्चर बंद करें; बागेश्वर बाबा धीरेंद्र शास्त्री ने क्यों कहा ऐसा

छतरपुर : प्रयागराज महाकुंभ में हुई भगदड़ की घटना पर बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने फिर बयान दिया है। बागेश्वर बाबा कहा कि महाकुंभ में हृदय विदारक, दुखद और आत्म को काष्ट पहुंचाने वाली घटना हुई। वर्तमान में कुंभ सुचारु रूप से चल रहा है। धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि महाकुंभ राजनीति अड्डा नहीं है। भरोसे का अड्डा है। महाकुंभ सनानत संस्कृति का अड्डा है। शास्त्री ने कहा कि महाकुंभ में VIP कल्चर को बंद करें ताकि आने श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

वीआईपी कल्चर बंद करें 
मध्य प्रदेश के छतरपुर में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने मीडिया ने गुरुवार को बातचीत की। महाकुंभ में हुई भगदड़ पर शास्त्री ने कहा कि बहुत ही हृदय विदारक, दुखद और आत्म को काष्ट पहुंचाने वाली घटना हुई है। महाकुंभ में वर्तमान में सुचारु रूप से व्यवस्थाएं चल रही हैं। लाखों-करोड़ों लोग पहुंचे हैं। आने वाले समय के जो पर्वे हैं। उन पर्वों में सरकार व्यवस्थाओं को और तेज करे। वीआईपी कल्चर को बंद करें ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार से कष्ट न पहुंचे।

‘महाकुंभ राजनीति का नहीं, भरोसे का अड्डा’
बागेश्वर बाबा ने कहा कि अंत में यही कहना है महाकुंभ राजनीति नहीं, आस्था का विषय है। महाकुंभ राजनीति अड्डा नहीं है। भरोसे का अड्डा है। महाकुंभ सनातन संस्कृति का अड्डा है। महाकुंभ भारत का परिचय है। भारत की संस्कृति का परिचय है। भारत के सनातन का परिचय है। मीडिया के एक सवाल पर शास्त्री ने कहा कि महाकुंभ में हिन्दू निश्चित रूप से जागा है। व्यापक रूप से जागा है। आने वाले कालांतर में हिन्दू और जागेगा। जिस देश का राजा आध्यात्मिक होता है। उस देश की प्रजा भी आध्यात्मिक होती है।

‘मेरे मंतव्य को तोड़-मरोड़कर किया पेश’
पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने महाकुंभ में हुई भगदड़ की घटना पर दिए गए बयान पर सफाई दी है। बागेश्वर बाबा ने कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से समझा गया है। बाबा ने दुख जताते हुए कहा कि उनके मंतव्य को तोड़-मरोड़कर पेश किया है। शास्त्री ने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था।

धीरेंद्र शास्त्री ने भगदड़ पर क्या कहा था…
बता दें कि महाकुंभ में मची भगदड़ में 30 लोगों की मौत हुई थी। भगदड़ की घटना पर धीरेंद्र शास्त्री ने कहा था कि महाप्रयाग एक पवित्र स्थान है। जो भी गंगा किनारे मृत्यु को प्राप्त करता है, उसे मोक्ष मिलता है। यहां कोई मरा नहीं, बल्कि लोग अपने तय समय से पहले चले गए हैं। मृत्यु तो अटल सत्य है, एक न एक दिन सबको जाना ही है। कोई 20 साल बाद जाएगा, कोई 30 साल बाद, लेकिन यह सुनिश्चित है कि मृत्यु को टाला नहीं जा सकता।

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